अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में श्रद्धालुओं से प्राप्त दान राशि के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में एक जनहित याचिका (PIL) दाखिल की गई है। याचिका में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) की निगरानी में समयबद्ध और न्यायालय पर्यवेक्षित जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
अधिवक्ता मोहित अशोक द्वारा दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पास आने वाले नकद दान के साथ-साथ सोना और चांदी जैसी बहुमूल्य भेंटों के प्रबंधन में गंभीर वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। याचिकाकर्ता ने भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) से ट्रस्ट के खातों का व्यापक फॉरेंसिक ऑडिट कराने की भी मांग की है।
याचिका में 8 जून को प्रकाशित एक राष्ट्रीय दैनिक की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है, जिसमें मंदिर के दान प्रबंधन और आंतरिक वित्तीय नियंत्रण से जुड़ी कथित विसंगतियों का उल्लेख किया गया था। याचिका के अनुसार, प्रारंभिक जांच के दौरान ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर्मचारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया था और लगभग चार लोगों को पूछताछ के लिए पकड़ा गया था।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि ट्रस्ट के एक कर्मचारी से जुड़े बैंक खाते से लगभग 5 लाख रुपये बरामद किए गए थे। इसके बावजूद, ट्रस्ट की ओर से किसी औपचारिक आंतरिक जांच के बजाय केवल आरोपों का खंडन किया गया, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं।
याचिका में ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रमुख महिपाल सिंह के कथित खुलासों का भी उल्लेख किया गया है। सिंह ने आरोप लगाया था कि नकद दान की गणना और लेखांकन प्रक्रिया में व्यवस्थित अनियमितताएं थीं। उनके अनुसार, लगभग 12 लाख रुपये की नकद राशि को आधिकारिक दस्तावेजों में 9 से 10 लाख रुपये के रूप में दर्ज किया जाता था, जिससे धन के संभावित दुरुपयोग की आशंका पैदा होती है।
याचिका में यह भी कहा गया है कि जब इन कथित अनियमितताओं की जानकारी ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों, जिनमें महासचिव चंपत राय और प्रवक्ता गोपाल राव शामिल हैं, को दी गई तो कोई जांच शुरू नहीं की गई। इसके बजाय शिकायत उठाने वाले अधिकारी को लेखा प्रक्रिया से हटा दिया गया।
इसके अतिरिक्त, कई महीनों की सीसीटीवी फुटेज हटाए जाने, सोना-चांदी से भरे दान पात्रों को उचित लेखा प्रविष्टियों औ
