वाराणसी जिला अदालत में महिला ने जज की कुर्सी संभाली, खुद चलाने लगी अदालत; सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

The Rajpatra

वाराणसी जिला अदालत में शुक्रवार को एक असामान्य घटना सामने आई, जब एक महिला कथित तौर पर अदालत कक्ष में पहुंचकर न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठ गई और स्वयं न्यायिक कार्यवाही संचालित करने का प्रयास करने लगी। इस घटना ने अदालत परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और प्रवेश नियंत्रण को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह घटना अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत में हुई, जहां उस समय न्यायाधीश अवकाश पर थे। बताया जाता है कि महिला सुबह करीब 9 बजे अदालत परिसर में पहुंची और न्यायाधीश के आने के समय के बारे में पूछताछ करने के बाद सीधे न्यायिक मंच (डायस) तक पहुंच गई।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, महिला न्यायाधीश की कुर्सी पर बैठ गई, मेज पर रखी केस फाइलों को देखने लगी और खुद को पीठासीन अधिकारी की तरह प्रस्तुत करने लगी। उसने कथित तौर पर अदालत की कार्यवाही शुरू होने की घोषणा करते हुए उपस्थित लोगों से गवाहों और साक्ष्यों को पेश करने के निर्देश भी दिए।

करीब एक घंटे तक चले इस घटनाक्रम के दौरान अदालत कक्ष में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। अदालत कर्मचारियों और अधिवक्ताओं ने कई बार महिला को कुर्सी छोड़ने के लिए समझाने का प्रयास किया, लेकिन वह अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं हुई।

स्थिति बिगड़ने पर कैंट थाने की पुलिस को बुलाया गया। महिला पुलिसकर्मियों की सहायता से उसे न्यायिक मंच से हटाकर पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया। पुलिस अधिकारियों ने प्रारंभिक जांच के बाद संकेत दिया कि महिला का व्यवहार मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की ओर इशारा कर सकता है। आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करने के बाद उसे उसके परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

वाराणसी सेंट्रल बार एसोसिएशन के सदस्यों के अनुसार, महिला उसी अदालत में लंबित एक मामले की पक्षकार है और अक्सर अदालत परिसर में आती-जाती रहती है। अधिवक्ताओं ने दावा किया कि उसने स्वयं को न्यायाधीश बताते हुए अदालत में मौजूद लोगों को निर्देश भी दिए।

घटना के बाद अदालत की सामान्य कार्यवाही बहाल कर दी गई। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने लौटने पर मामले की जानकारी ली, जबकि जिला न्यायाधीश ने सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की जांच के आदेश दिए हैं। संबंधित अधिकारियों से यह भी पूछा गया है कि महिला बिना रोक-टोक अदालत कक्ष और न्यायिक मंच तक कैसे पहुंच गई।

इस घटना ने जिला न्यायालयों में सुरक्षा प्रोटोकॉल, अदालत कक्षों तक पहुंच और संवेदनशील न्यायिक क्षेत्रों की निगरानी व्यवस्था को लेकर व्यापक चर्चा छेड़ दी है।