दिल्ली दंगा साजिश केस: उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस

The Rajpatra Law

दिल्ली की एक अदालत ने 2020 के उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगा साजिश मामले में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत आरोपित उमर खालिद और शरजील इमाम की नियमित जमानत याचिकाओं पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी किया है। अदालत ने पुलिस से जवाब मांगा है और मामले की अगली सुनवाई 4 जुलाई को निर्धारित की है।

कड़कड़डूमा कोर्ट के अवकाशकालीन न्यायाधीश डॉ. सुमेध कुमार सेठी ने शनिवार को दोनों आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया।

दोनों आरोपियों ने नई जमानत याचिकाएं उस समय दाखिल की हैं, जब हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय ने उनके खिलाफ पहले दिए गए जमानत अस्वीकृति आदेशों में अपनाई गई कानूनी व्याख्या पर सवाल उठाए थे। वर्तमान में सुप्रीम कोर्ट UAPA मामलों में जमानत देने के मानदंडों, विशेष रूप से लंबी अवधि की हिरासत और मुकदमे में देरी से जुड़े मुद्दों की समीक्षा कर रहा है।

शरजील इमाम ने अपनी याचिका में कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा जमानत से इनकार किए जाने के छह माह से अधिक समय बीत जाने के बावजूद मुकदमे में कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। उन्होंने अदालत को बताया कि आरोप तय करने पर बहस अब भी पूरी नहीं हो सकी है और वह लगभग छह वर्षों से हिरासत में हैं।

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने 6 मार्च 2020 को एफआईआर संख्या 59/2020 दर्ज की थी। इस एफआईआर में भारतीय दंड संहिता (IPC) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ UAPA के प्रावधान भी लगाए गए थे। यह मामला फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से संबंधित है।

अभियोजन पक्ष का आरोप है कि आरोपियों ने एक ऐसी साजिश में भूमिका निभाई, जिसके परिणामस्वरूप दंगे भड़के और जिनमें कई लोगों की मौत हुई, अनेक लोग घायल हुए तथा व्यापक स्तर पर संपत्ति का नुकसान हुआ। हालांकि सभी आरोपियों ने इन आरोपों को खारिज करते हुए स्वयं को निर्दोष बताया है और दावा किया है कि उन्हें झूठा फंसाया गया है।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि UAPA के तहत दर्ज मामलों में लंबी अवधि की विचाराधीन कैद को लेकर देशभर में बहस जारी है। हाल के दिनों में सुप्रीम कोर्ट ने भी ऐसे मामलों में मुकदमों की धीमी गति पर चिंता व्यक्त की है और यह विचार कर रहा है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता तथा त्वरित सुनवाई के संवैधानिक अधिकारों को जमानत संबंधी निर्णयों में किस हद तक महत्व दिया जाना चाहिए।

एफआईआर संख्या 59/2020 में उमर खालिद और शरजील इमाम के अलावा पूर्व आम आदमी पार्टी पार्षद ताहिर हुसैन, खालिद सैफी, इशरत जहां, मीरान हैदर, गुलफिशा फातिमा, शिफा-उर-रहमान, आसिफ इकबाल तन्हा, शादाब अहमद, तस्लीम अहमद, सलीम मलिक, मोहम्मद सलीम खान, अथर खान, सफूरा जरगर, फैजान खान और नताशा नरवाल को भी आरोपी बनाया गया है।