नई दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की उपस्थिति में भारत सरकार, असम सरकार और नगालैंड सरकार के बीच असम-नगालैंड सीमावर्ती क्षेत्रों में खनिज तेल संचालन (मिनरल ऑयल ऑपरेशंस) को लेकर एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी, असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्वा सरमा, नगालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो तथा दोनों राज्यों और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि यह कदम न केवल तेल और प्राकृतिक गैस के अन्वेषण तथा उत्पादन को नई गति देगा, बल्कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘समृद्ध पूर्वोत्तर’ की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में भी महत्वपूर्ण साबित होगा। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर के राज्य अब ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ आगे बढ़ रहे हैं और राष्ट्रीय संपदा के दोहन में सहयोग कर रहे हैं।
अमित शाह ने बताया कि नगालैंड सरकार छह मौजूदा तेल क्षेत्रों के अलावा पूरे राज्य में तेल एवं गैस की खोज के लिए सहमत है, जबकि असम सरकार ने भी इस पहल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों राज्यों के लिए लाभकारी है और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र में खनिज संसाधनों के दोहन का मार्ग प्रशस्त करेगा।
गृह मंत्री ने कहा कि पूर्वोत्तर भारत तेल, गैस और अन्य खनिजों के विशाल भंडार से समृद्ध है। इस समझौते के बाद क्षेत्र की तेल उत्पादन क्षमता में दस गुना से अधिक वृद्धि की संभावना है। उन्होंने विश्वास जताया कि नगालैंड में उपलब्ध तेल और गैस संसाधनों के दोहन से भारत की विदेशी ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों और विवादों के कारण दोनों राज्यों के आर्थिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा था, लेकिन यह समझौता अब विकास और निवेश के नए अवसरों का द्वार खोलेगा। शाह ने इसे सहकारी संघवाद का उत्कृष्ट उदाहरण बताते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वय से राष्ट्रीय हितों को आगे बढ़ाया जा रहा है।
गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर क्षेत्र में शांति, विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार को प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 के बाद क्षेत्र में विभिन्न संगठनों और समूहों के साथ 12 महत्वपूर्ण समझौते हुए हैं, जिससे हिंसा में लगभग 80 प्रतिशत की कमी आई है। इसके साथ ही निवेश, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
अमित शाह ने कहा कि पूर्वोत्तर के 80 प्रतिशत से अधिक क्षेत्र को सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून (AFSPA) के दायरे से बाहर किया जा चुका है और उम्मीद है कि अगले वर्ष तक अधिकांश राज्यों से यह कानून पूरी तरह हटाया जा सकेगा।
उन्होंने वैश्विक ऊर्जा संकट का उल्लेख करते हुए कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्षों के बीच ऊर्जा आत्मनिर्भरता भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे समय में यह समझौता भविष्य में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
यह त्रिपक्षीय समझौता असम और नगालैंड के बीच चिन्हित क्षेत्रों में पेट्रोलियम की खोज और उत्पादन गतिविधियों के लिए सुरक्षित, स्थिर और अनुकूल वातावरण सुनिश्चित करेगा। इसके तहत परिचालन गतिविधियों की निरंतरता, कर्मियों एवं संपत्तियों की सुरक्षा तथा सभी हितधारकों के बीच बेहतर समन्वय के लिए एक संगठित ढांचा तैयार किया गया है।
समझौते से अपस्ट्रीम पेट्रोलियम क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा मिलने, हाइड्रोकार्बन परियोजनाओं में स्थिरता आने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूती मिलने की उम्मीद है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह पारदर्शी और सहयोगात्मक तरीके से खोज एवं उत्पादन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जिससे राष्ट्रीय आर्थिक विकास और ऊर्जा आत्मनिर्भरता के लक्ष्य को बल मिलेगा।
