नाबालिग को दो माह तक वयस्क जेल में रखने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने लिया स्वतः संज्ञान, यूपी प्रशासन से मांगी रिपोर्ट

National Human Rights Commission

नई दिल्ली – राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले के एक 16 वर्षीय किशोर को कथित रूप से वयस्क मानकर दो महीने तक जेल में रखने के मामले में स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने इस घटना को मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन से जुड़ा मामला मानते हुए उत्तर प्रदेश के कारागार प्रशासन और पुलिस विभाग से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है।

एनएचआरसी द्वारा जारी बयान के अनुसार, मीडिया में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि शाहजहांपुर निवासी 16 वर्षीय किशोर को गिरफ्तार कर गौतम बुद्ध नगर जिले की कासना जेल में वयस्क कैदी के रूप में रखा गया था। बाद में अस्थि परीक्षण (ऑसिफिकेशन टेस्ट) में उसकी आयु नाबालिग साबित होने के बावजूद उसे किशोर गृह भेजने में छह दिन का अतिरिक्त समय लगा।

आयोग ने यह भी संज्ञान लिया है कि न्यायालय से जमानत मिलने के बाद भी किशोर अब तक किशोर गृह में ही रह रहा है, क्योंकि उसका आर्थिक रूप से कमजोर परिवार जमानत के लिए आवश्यक जमानतदार और बांड की व्यवस्था नहीं कर सका है।

एनएचआरसी ने कहा है कि यदि मीडिया रिपोर्ट में वर्णित तथ्य सही पाए जाते हैं, तो यह पीड़ित के मानवाधिकारों के गंभीर हनन का मामला है। इस संबंध में आयोग ने उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक तथा कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा के महानिदेशक को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।

इसके अतिरिक्त आयोग ने अपने महानिदेशक (जांच) को मामले की मौके पर जांच कराने और एक सप्ताह के भीतर जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को किशोर को उसके नाम से आए एक पार्सल के संबंध में फोन कॉल प्राप्त हुआ था। निर्धारित स्थान पर पहुंचने पर वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे हिरासत में ले लिया। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।

रिपोर्ट में यह आरोप भी लगाया गया है कि पुलिस ने हिरासत के दौरान किशोर के साथ मारपीट की और कुछ दस्तावेजों पर जबरन हस्ताक्षर करवाए। बताया गया है कि यह गिरफ्तारी जिले में मजदूरों द्वारा वेतन वृद्धि और बेहतर कार्य परिस्थितियों की मांग को लेकर किए गए विरोध प्रदर्शन के बाद हुई थी।

यह मामला किशोर न्याय प्रणाली, पुलिस कार्रवाई की वैधानिकता तथा नाबालिगों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। एनएचआरसी की जांच और राज्य सरकार से मांगी गई रिपोर्ट के बाद मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका स्पष्ट होने की संभावना है।