गोवा अवैध लौह अयस्क खनन मामला: ईडी ने सलगांवकर समूह की ₹1,023 करोड़ की संपत्तियां कुर्क कीं : धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई, ईडी का दावा- अवैध खनन और कम मूल्य पर निर्यात से ₹5,237 करोड़ से अधिक की अवैध कमाई

Directorate of Enforcement - ED

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गोवा के चर्चित अवैध लौह अयस्क खनन मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत लगभग ₹1,023 करोड़ मूल्य की संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क कर ली हैं। यह कार्रवाई सलगांवकर समूह और उससे जुड़ी कंपनियों के खिलाफ की गई है।

ईडी के अनुसार, कुर्क की गई संपत्तियां स्वर्गीय अनिल वासुदेव सलगांवकर की संपदा तथा सलगांवकर माइनिंग इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, शांतिलाल खुशालदास एंड ब्रदर्स प्राइवेट लिमिटेड, एस. कांतीलाल एंड कंपनी प्राइवेट लिमिटेड, सालिथो ओर्स प्राइवेट लिमिटेड, वर्टेक्स न्यूटन प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड और सुबर्णरेखा पोर्ट प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर दर्ज हैं।

जांच एजेंसी ने बताया कि यह जांच गोवा सीआईडी अपराध शाखा द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर शुरू की गई थी। ईडी ने कहा कि उच्चतम न्यायालय ने वर्ष 2014 और 2018 के अपने महत्वपूर्ण फैसलों में 22 नवंबर 2007 के बाद गोवा में संचालित सभी खनन गतिविधियों को अवैध माना था।

ईडी के अनुसार, मामले में अपराध से अर्जित कुल आय लगभग ₹5,237.84 करोड़ आंकी गई है। जांच में सामने आया है कि समूह की कंपनियों ने वर्ष 2007 से 2012 के बीच 10 खनन पट्टों से अवैध रूप से लौह अयस्क का उत्खनन किया, जिससे लगभग ₹2,492.95 करोड़ का राजस्व प्राप्त हुआ।

जांच एजेंसी ने यह भी आरोप लगाया है कि संबंधित कंपनियों ने लौह अयस्क को विदेशी शेल कंपनियों को कम कीमत पर बेचकर अतिरिक्त ₹2,744 करोड़ का अवैध लाभ अर्जित किया। ईडी का कहना है कि इस प्रक्रिया के माध्यम से वास्तविक मूल्य को छिपाकर अनुचित आर्थिक लाभ प्राप्त किया गया।

ईडी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और अवैध खनन से जुड़े वित्तीय लेनदेन तथा अन्य लाभार्थियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।