छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रक्रियात्मक कमी से रद्द प्रस्ताव को खारिज प्रस्ताव नहीं माना जाएगा।

JUSTICE AMITENDRA KISHORE PRASAD, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सरपंच के खिलाफ दोबारा अविश्वास प्रस्ताव लाने को लेकर महत्वपूर्ण फैसला दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एक साल की रोक तभी लागू होगी, जब पिछला अविश्वास प्रस्ताव वास्तव में खारिज हुआ हो। यदि पिछली कार्यवाही किसी प्रक्रियात्मक कमी के कारण रद्द हुई थी और प्रस्ताव पर मतदान ही नहीं हुआ, तो उसे खारिज माना नहीं जाएगा।

जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने राजनांदगांव की ग्राम पंचायत सोमनी की सरपंच नीलीमा साहू की याचिका खारिज कर दी। सरपंच ने 10 अगस्त 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर 20 अगस्त को बैठक बुलाने का निर्देश दिया गया था।

कोर्ट ने कहा कि छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 21(3)(iii) के तहत एक साल की रोक केवल पिछले अविश्वास प्रस्ताव के खारिज होने की स्थिति में लागू होती है। इस मामले में मार्च 2026 की पिछली कार्यवाही सात दिन की स्पष्ट नोटिस अवधि का पालन नहीं होने के कारण हाईकोर्ट ने रद्द कर दी थी। इसलिए वह प्रस्ताव खारिज नहीं हुआ था।

हाईकोर्ट ने यह भी माना कि एसडीओ ने पंचायत के सदस्यों द्वारा दिए गए प्रस्ताव की जांच कर आवश्यक संतुष्टि के बाद बैठक बुलाने का आदेश दिया था। एक उपसरपंच और 15 पंचों ने सरपंच के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया था। कोर्ट ने एसडीओ के आदेश में कोई कानूनी कमी नहीं पाई और याचिका खारिज कर दी।