नई दिल्ली, 17 अगस्त। सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी (AAP) को बड़ी अंतरिम राहत देते हुए Meta को गुजरात इकाई के Instagram और Facebook पेज बहाल करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने हालांकि स्पष्ट किया कि आपत्तिजनक पोस्ट हटाए जाने चाहिए। न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने यह आदेश AAP की ओर से दायर अंतरिम आवेदन पर सुनाया।
AAP की गुजरात इकाई का Instagram अकाउंट “@aapgujarat” और Facebook पेज अप्रैल 2026 में ब्लॉक कर दिए गए थे। पार्टी के अनुसार, दोनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर उसके कुल 10.39 लाख से अधिक फॉलोअर्स थे। पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट में दलील दी कि इन अकाउंट्स को ब्लॉक किए जाने से उसकी राजनीतिक गतिविधियों और जनता तक सीधे संवाद के महत्वपूर्ण माध्यम पर गंभीर असर पड़ा है।
मामले की सुनवाई के दौरान AAP की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अंतरिम राहत देने का आग्रह किया। उन्होंने कोर्ट को बताया कि केंद्र की ओर से मामले को फिर स्थगित करने की मांग की गई है। शुरुआत में मामले को कुछ समय के लिए टाल दिया गया था क्योंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता किसी अन्य अदालत में पेश हो रहे थे। इसके बाद जब मामला दोबारा सुनवाई के लिए आया, तो दूसरे पक्ष की ओर से बुधवार तक स्थगन की मांग की गई।
पीठ ने बार-बार स्थगन की मांग पर सवाल उठाया और अंतरिम आवेदन पर फैसला करते हुए AAP के गुजरात सोशल मीडिया अकाउंट्स को बहाल करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि आपत्तिजनक पोस्ट हटाए जाने चाहिए। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद होगी।
अप्रैल में किया गया था अकाउंट ब्लॉक
AAP गुजरात के दोनों सोशल मीडिया अकाउंट 25 अप्रैल 2026 को ब्लॉक किए गए थे। यह कार्रवाई गुजरात में स्थानीय निकाय चुनावों से कुछ समय पहले हुई थी। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सोशल मीडिया सामग्री में गुजराती फिल्मों के दृश्यों और क्लिप का कथित रूप से बिना अनुमति इस्तेमाल किए जाने से जुड़े कॉपीराइट उल्लंघन के आरोप कार्रवाई का आधार बने थे।
AAP नेताओं ने उस समय अकाउंट ब्लॉक किए जाने को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताते हुए आरोप लगाया था कि Meta ने भारतीय जनता पार्टी के कहने पर कार्रवाई की। हालांकि, इस आरोप का अंतिम निर्धारण अभी सुप्रीम कोर्ट के समक्ष लंबित मुख्य याचिका में होना है।
Section 79(3)(b) को लेकर भी उठाया बड़ा सवाल
AAP ने अपनी मुख्य याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) के तहत सोशल मीडिया सामग्री या अकाउंट को ब्लॉक करने की कानूनी शक्ति को चुनौती दी है। पार्टी का कहना है कि धारा 79(3)(b) को सरकारी अधिकारियों के लिए किसी सूचना को ब्लॉक करने के स्वतंत्र अधिकार के स्रोत के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 सामान्य परिस्थितियों में मध्यस्थों को उनके प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध तीसरे पक्ष की सामग्री के संबंध में कुछ कानूनी दायित्वों से संरक्षण देती है। धारा 79(3)(b) के तहत यह संरक्षण उन परिस्थितियों में उपलब्ध नहीं रहता, जब किसी अदालत के आदेश या सरकार की अधिसूचना के माध्यम से अवैध सामग्री के संबंध में वास्तविक जानकारी मिलने के बाद भी मध्यस्थ उस सामग्री को हटाने या उसकी पहुंच निष्क्रिय करने में विफल रहता है।
AAP ने इस प्रावधान से संबंधित निर्देशों, नियमों और अधिसूचनाओं को भी चुनौती दी है, जहां उनका इस्तेमाल ऑनलाइन सामग्री या अकाउंट को ब्लॉक करने के लिए किया गया है। पार्टी ने गुजरात इकाई के अकाउंट्स को ब्लॉक करने से संबंधित रिकॉर्ड भी अदालत के समक्ष पेश करने की मांग की है।
Article 19(2) और Section 69A के तहत प्रक्रिया का मुद्दा
AAP ने सुप्रीम कोर्ट से यह भी मांग की है कि राजनीतिक दलों के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक या निलंबित करने के लिए स्पष्ट प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय तय किए जाएं। पार्टी के अनुसार, ऐसी कार्रवाई से पहले संबंधित पक्ष को नोटिस दिया जाना चाहिए, सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए और कार्रवाई के लिखित कारण बताए जाने चाहिए।
याचिका में कहा गया है कि किसी राजनीतिक दल के सोशल मीडिया अकाउंट पर रोक संविधान के अनुच्छेद 19(2) में निर्धारित प्रतिबंधों और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A के अनुरूप होनी चाहिए।
धारा 69A सरकार को कुछ निर्धारित आधारों पर ऑनलाइन जानकारी तक सार्वजनिक पहुंच को ब्लॉक करने का अधिकार देती है। इनमें भारत की संप्रभुता और अखंडता, देश की रक्षा, राज्य की सुरक्षा, विदेशी राज्यों के साथ मैत्रीपूर्ण संबंध, सार्वजनिक व्यवस्था तथा कुछ संज्ञेय अपराधों के लिए उकसावे को रोकना जैसे आधार शामिल हैं।
राजनीतिक दलों के डिजिटल अधिकारों पर महत्वपूर्ण मामला
सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश फिलहाल AAP गुजरात के सोशल मीडिया अकाउंट्स को बहाल करने तक सीमित है। कोर्ट ने आपत्तिजनक पोस्ट हटाने की शर्त भी लगाई है। मुख्य याचिका में सोशल मीडिया अकाउंट्स को ब्लॉक करने की कानूनी शक्ति, प्रक्रिया, कारण बताने की आवश्यकता और राजनीतिक दलों के डिजिटल संचार के अधिकार से जुड़े व्यापक संवैधानिक और कानूनी प्रश्न उठाए गए हैं।
इस मामले की अगली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट यह स्पष्ट कर सकता है कि राजनीतिक दलों के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट्स के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करते समय सरकारी एजेंसियों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को किन कानूनी और प्रक्रियात्मक मानकों का पालन करना होगा। फिलहाल, अंतरिम आदेश के बाद AAP की गुजरात इकाई को अपने प्रमुख डिजिटल संचार माध्यम दोबारा संचालित करने का रास्ता मिल गया है।
