रायपुर, 16 अगस्त। मधु श्रावणी (कजरी तीज) के पावन अवसर पर मैथिल पारा स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में भगवान श्री राधा-कृष्ण का विशेष हरित श्रृंगार किया गया। यह मंदिर स्वर्गीय श्रीमती राजेश्वरी देवी झा एवं स्वर्गीय पंडित बसंत लाल झा द्वारा निर्मित कराया गया था। पर्व के अवसर पर मंदिर परिसर में धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण बना रहा।
पंडित विजय कुमार झा ने बताया कि मधु श्रावणी, जिसे कजरी तीज के नाम से भी जाना जाता है, मिथिला सहित उत्तर भारत की महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक महत्व रखने वाला पर्व है। इस अवसर पर महिलाएं भगवान शिव-पार्वती तथा अन्य देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, अखंड सौभाग्य और मंगलमय जीवन की कामना करती हैं। पर्व के दौरान लोक परंपराओं और पारंपरिक भजनों का भी विशेष महत्व रहता है।
इसी धार्मिक परंपरा के अनुरूप राधा-कृष्ण मंदिर में भगवान का हरित श्रृंगार किया गया। हरे रंग की सजावट और पुष्पों से मंदिर का वातावरण आकर्षक एवं भक्तिमय नजर आया। श्रद्धालुओं ने पूजा-अर्चना के साथ भगवान श्री राधा-कृष्ण के दर्शन किए।
इस अवसर पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से भजन-कीर्तन प्रस्तुत किए। कार्यक्रम में श्रीमती रचना ठाकुर, श्रीमती सोम ठाकुर, श्रीमती विभा ठाकुर, श्रीमती पूनम झा, कुमारी माही ठाकुर, श्रीमती माधुरी ठाकुर सहित अन्य महिलाओं ने सहभागिता की। भजन-कीर्तन से मंदिर परिसर भक्तिमय हो उठा और उपस्थित श्रद्धालुओं ने धार्मिक आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
मधु श्रावणी का धार्मिक महत्व
मधु श्रावणी मिथिला की पारंपरिक लोक-संस्कृति और धार्मिक आस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। कजरी तीज के रूप में मनाए जाने वाले इस पर्व में विशेष रूप से महिलाओं की सहभागिता रहती है। लोकगीत, पूजा, व्रत और पारंपरिक अनुष्ठान इस पर्व की प्रमुख विशेषताएं हैं। यह पर्व वैवाहिक सुख, परिवार की समृद्धि और दांपत्य जीवन की मंगलकामना से भी जुड़ा माना जाता है। रायपुर में आयोजित इस कार्यक्रम ने मैथिल समाज की सांस्कृतिक एवं धार्मिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखने का संदेश दिया।
