आईआईएम रायपुर में 10वें एचआर समिट 2026 का शुभारंभ, एआई युग में मानवीय कौशल और नेतृत्व पर जोर

IIM Raipur Chhattisgarh

रायपुर, 8 अगस्त। भारतीय प्रबंध संस्थान (आईआईएम) रायपुर में शनिवार को 10वें मानव संसाधन (एचआर) समिट 2026 का शुभारंभ हुआ। ‘एक्सप्लोरिंग द फ्यूचर ऑफ वर्क—डिजाइन्ड बाय पीपल, ड्रिवन बाय इनोवेशन’ विषय पर आयोजित दो दिवसीय समिट में करीब 35 मुख्य मानव संसाधन अधिकारियों (सीएचआरओ), वरिष्ठ मानव संसाधन विशेषज्ञों, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों और विचारकों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), स्वचालन और कार्यस्थल में बदलती अपेक्षाओं के बीच मानवीय क्षमता, रचनात्मकता और जिम्मेदार नेतृत्व की भूमिका पर व्यापक चर्चा की गई।

उद्घाटन समारोह में आईआईएम रायपुर के निदेशक-प्रभारी प्रोफेसर संजीव पराशर ने कहा कि एआई, स्वचालन और कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं के कारण संगठनों के काम करने के तरीके में तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे दौर में परिवर्तन की प्रक्रिया के केंद्र में लोगों को रखना पहले से अधिक आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि तकनीकी नवाचार विकास की गति बढ़ा सकता है, लेकिन मानवीय रचनात्मकता, निर्णय लेने की क्षमता और संवेदनशीलता ही इस प्रगति को सही दिशा प्रदान करती है। उनके अनुसार, मानव संसाधन समिट इस विचार को मजबूत करता है कि प्रबंधन शिक्षा का उद्देश्य ऐसे जिम्मेदार और मानव-केंद्रित नेतृत्वकर्ताओं को तैयार करना होना चाहिए, जो उद्योग और शिक्षा जगत के बीच प्रभावी संवाद को भी आगे बढ़ा सकें।

समिट की मुख्य अतिथि बीएनवाई में अर्ली करियर्स रिक्रूटिंग से जुड़ी मालविका सिंह ने कहा कि एआई के तेजी से विस्तार के बावजूद मानवीय गुणों का महत्व कम नहीं होगा। सहानुभूति, विश्वास, ईमानदारी और सही निर्णय लेने की क्षमता भविष्य के कार्यक्षेत्र में भी महत्वपूर्ण बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि एचआर समिट जैसे मंच उद्योग, शिक्षा जगत और विद्यार्थियों को एक-दूसरे से सीखने तथा कार्यक्षेत्र में होने वाले बदलावों के लिए तैयार होने का अवसर प्रदान करते हैं।

समिट का 10वां संस्करण आईआईएम रायपुर की उद्योग और शिक्षा जगत के बीच कार्यक्षेत्र की बदलती प्रकृति पर निरंतर संवाद स्थापित करने की पहल को आगे बढ़ाता है। सम्मेलन में एआई, स्वचालन और कर्मचारियों की बदलती अपेक्षाओं के कारण संगठनों में हो रहे बदलावों के साथ प्रभावी नेतृत्व, संगठनात्मक प्रक्रियाओं और मानवीय पहलुओं पर चर्चा की गई। इस दौरान वरिष्ठ उद्योग नेताओं, शिक्षकों और विद्यार्थियों को एक साझा मंच मिला, जहां वर्तमान संगठनात्मक चुनौतियों और भविष्य की आवश्यकताओं पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।

समिट के पहले दिन तीन प्रमुख पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं। पहली चर्चा ‘बदलती दुनिया में भविष्य के नेताओं को कौन से कौशल रोजगार के लिए तैयार बनाते हैं?’ विषय पर केंद्रित रही। आईआईएम रायपुर की प्रोफेसर स्मृति पांडे के संचालन में हुई चर्चा में एआई के माध्यम से विश्लेषणात्मक क्षमताओं में हो रही वृद्धि के साथ मानवीय कौशल के बढ़ते महत्व पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने रोजगार-योग्यता, परिस्थितियों को समझने की क्षमता, जटिल समस्याओं के समाधान, निरंतर सीखने, धैर्य, अनुकूलनशीलता और मानवीय मूल्यों को भविष्य के पेशेवरों के लिए आवश्यक गुण बताया।

दूसरी पैनल चर्चा ‘एआई के दौर में करियर, नेतृत्व और कार्यक्षेत्र की नई परिकल्पना’ विषय पर हुई। आईआईएम रायपुर की प्रोफेसर दामिनी सैनी के संचालन में हुई इस चर्चा में एआई के कारण करियर, संगठनात्मक भूमिकाओं और कार्यस्थल के मॉडल में आ रहे बदलावों पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि एआई के बढ़ते उपयोग के बीच अनुकूलनशीलता, समस्या समाधान, डेटा को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने की क्षमता, संदर्भ को समझने की योग्यता और मानवीय निगरानी का महत्व लगातार बढ़ रहा है।

तीसरी पैनल चर्चा ‘सीमाओं से आगे के लिए एमबीए प्रतिभा को तैयार करना’ विषय पर केंद्रित रही। इसमें बदलते करियर परिदृश्य में पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़ने और लगातार नई क्षमताएं विकसित करने की आवश्यकता पर विचार किया गया। विशेषज्ञों ने कहा कि भविष्य के करियर में केवल किसी एक क्षेत्र की विशेषज्ञता पर्याप्त नहीं होगी। व्यापक समझ, अनुकूलनशीलता, स्वयं को नए रूप में ढालने की क्षमता और मौलिक सोच पेशेवरों के लिए महत्वपूर्ण होगी।

समिट के पहले दिन की चर्चाओं में भविष्य के कार्यस्थल के लिए आवश्यक कौशल, नेतृत्व क्षमता और संगठनात्मक बदलाव के विभिन्न पहलुओं पर विचार किया गया। समिट के दूसरे दिन हितधारक मूल्य सृजन, पर्यावरणीय, सामाजिक एवं शासन यानी ईएसजी, उद्देश्य-आधारित नेतृत्व तथा मानव-एआई सहयोग जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है। इन सत्रों में जिम्मेदार और भविष्य के लिए तैयार कार्यस्थलों के निर्माण तथा तकनीकी नवाचार और मानवीय सरोकारों के बीच संतुलन स्थापित करने में संगठनों की भूमिका पर विचार-विमर्श किया जाएगा।