छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने बीएससी नर्सिंग शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रवेश के लिए राज्य सरकार द्वारा निर्धारित 10 पर्सेंटाइल की न्यूनतम पात्रता को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया है। न्यायालय ने कहा कि भारतीय नर्सिंग परिषद (आईएनसी) द्वारा न्यूनतम पर्सेंटाइल में दी गई छूट के बाद राज्य सरकार अपनी ओर से नई पात्रता शर्त लागू नहीं कर सकती।
न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने निजी नर्सिंग कॉलेज एसोसिएशन और छात्र-छात्राओं की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि शेष रिक्त सीटों पर बिना किसी न्यूनतम पर्सेंटाइल की शर्त लगाए नई काउंसलिंग कराई जाए। प्रवेश केवल कॉमन एंट्रेंस टेस्ट में शामिल अभ्यर्थियों की मेरिट और अन्य निर्धारित पात्रताओं के आधार पर दिए जाएं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि भारतीय नर्सिंग परिषद अधिनियम, 1947 तथा छत्तीसगढ़ नर्सिंग प्रवेश नियम, 2019 के तहत प्रवेश मानकों का निर्धारण भारतीय नर्सिंग परिषद का अधिकार है। ऐसे में राज्य सरकार कार्यपालिका के आदेश से इन मानकों में बदलाव या नई शर्त नहीं जोड़ सकती। न्यायालय ने यह भी कहा कि यह आदेश केवल इस मामले की विशेष परिस्थितियों तक सीमित रहेगा और भविष्य के प्रवेश सत्रों के लिए मिसाल नहीं माना जाएगा।
