ताजमहल को ‘तेजो महालय’ बताने वाली याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई आज, सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग

The Rajpatra Law Judgment

ताजमहल को प्राचीन शिव मंदिर ‘तेजो महालय’ घोषित करने की मांग से जुड़े विवाद ने एक बार फिर कानूनी मोड़ ले लिया है। आगरा की निचली अदालतों द्वारा ताजमहल का निरीक्षण, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से इनकार किए जाने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। इस याचिका पर सोमवार को सुनवाई प्रस्तावित है।

याचिका भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाथेश्वर विराजमान की ओर से उनके नेक्स्ट फ्रेंड अधिवक्ता हरि शंकर जैन तथा अन्य श्रद्धालुओं द्वारा दायर की गई है। प्रतिवादियों में भारत संघ, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) और अन्य संबंधित प्राधिकरणों को पक्षकार बनाया गया है।

मामले की शुरुआत वर्ष 2015 में आगरा की सिविल जज (सीनियर डिवीजन) अदालत में दायर एक वाद से हुई थी। वाद में दावा किया गया है कि ताजमहल मूल रूप से भगवान शिव का प्राचीन मंदिर था, जिसे ‘तेजो महालय’ के नाम से जाना जाता था। याचिकाकर्ताओं ने अदालत से इस संबंध में घोषणा करने के साथ ही हिंदू श्रद्धालुओं को परिसर में दर्शन और पूजा करने की अनुमति देने की भी मांग की है। उनका कहना है कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत उन्हें धार्मिक पूजा का मौलिक अधिकार प्राप्त है।

वाद लंबित रहने के दौरान वर्ष 2019 में याचिकाकर्ताओं ने सिविल प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के तहत एक आवेदन प्रस्तुत कर ताजमहल का न्यायिक निरीक्षण कराने तथा उसकी संरचनात्मक और स्थापत्य विशेषताओं की फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की थी। उनका तर्क था कि यह साक्ष्य वाद के निष्पक्ष और प्रभावी निस्तारण के लिए आवश्यक है।

हालांकि, सिविल जज (सीनियर डिवीजन), आगरा ने यह आवेदन खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि वादियों ने संपत्ति की पहचान से संबंधित आवश्यक राजस्व अभिलेख, जैसे खसरा और खतौनी, प्रस्तुत नहीं किए हैं तथा संपत्ति का विवरण प्रतिवादियों के अभिलेखों से मेल नहीं खाता। इसके बाद दायर सिविल पुनरीक्षण याचिका को अतिरिक्त जिला न्यायाधीश, आगरा ने इस वर्ष अप्रैल में विचारणीय न मानते हुए खारिज कर दिया।

अब हाईकोर्ट में दायर याचिका में इन दोनों आदेशों को चुनौती देते हुए कहा गया है कि निचली अदालतों ने कानून के विपरीत और अधिकार क्षेत्र का उचित प्रयोग किए बिना आवेदन को अस्वीकार किया। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ताजमहल विश्वप्रसिद्ध संरक्षित स्मारक है, इसलिए उसकी पहचान को लेकर कोई विवाद नहीं है। ऐसे में केवल राजस्व अभिलेखों के अभाव को आधार बनाकर एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने से इनकार करना न्यायसंगत नहीं था।

याचिका में यह भी दावा दोहराया गया है कि ताजमहल का निर्माण मूल रूप से 1155-56 ईस्वी में राजा परमर्दि देव ने भगवान शिव के मंदिर के रूप में कराया था। बाद में यह राजा मानसिंह और फिर जयपुर के राजा जयसिंह के अधिकार में रहा। याचिकाकर्ताओं का आरोप है कि मुगल सम्राट शाहजहां ने इस भवन को अपने कब्जे में लेकर इसे मुमताज महल की याद में मकबरे का स्वरूप दे दिया। यह याचिकाकर्ताओं का दावा है, जिस पर अभी अदालत ने कोई निष्कर्ष नहीं दिया है।

याचिका में कहा गया है कि स्मारक में 109 से अधिक ऐसे स्थापत्य, ऐतिहासिक और पुरातात्विक संकेत मौजूद हैं, जो इसे मूल रूप से हिंदू मंदिर बताते हैं। इनमें गुंबद के चारों ओर कमल की आकृति, शिखर पर कलश तथा एएसआई अभिलेखों में दर्ज गौशाला जैसी संरचना का उल्लेख किया गया है। साथ ही यह भी दावा किया गया है कि स्मारक के कई हिस्से आज भी बंद हैं और वहां के वास्तविक स्वरूप का पता केवल न्यायालय द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर के निरीक्षण से ही चल सकता है।

याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ताजमहल एएसआई के नियंत्रण में संरक्षित स्मारक है, इसलिए उन्हें स्वतंत्र रूप से अंदर फोटोग्राफी या वीडियोग्राफी करने का अधिकार नहीं है। ऐसे में केवल अदालत द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नर ही निष्पक्ष रूप से निरीक्षण कर आवश्यक तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड तैयार कर सकता है, जो वाद के निर्णय में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित होंगे।

याचिका में हाईकोर्ट से अनुरोध किया गया है कि आगरा की दोनों अदालतों के आदेश निरस्त कर मामले पर कानून के अनुसार पुनर्विचार का निर्देश दिया जाए। साथ ही अंतरिम राहत के रूप में एएसआई के महानिदेशक को निर्देश देने की मांग की गई है कि वे याचिकाकर्ताओं की उपस्थिति में ताजमहल के भीतर और बाहर की फोटोग्राफी कराकर उसका रिकॉर्ड हाईकोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करें, ताकि मामले का प्रभावी निस्तारण किया जा सके। फिलहाल इस मामले में हाईकोर्ट द्वारा कोई अंतिम निर्णय नहीं दिया गया है और याचिका पर सुनवाई सोमवार को होनी है।