नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केरल के सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में सीधे भर्ती किए गए हायर सेकेंडरी स्कूल टीचर्स (HSST), जूनियर की समान वेतन की मांग खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि एक ही कैडर में कार्य करने के बावजूद भर्ती का तरीका और पूर्व शिक्षण अनुभव अलग होने के कारण अलग-अलग वेतनमान निर्धारित किया जा सकता है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने कहा कि केवल समान पद, योग्यता और कार्य के आधार पर “समान कार्य के लिए समान वेतन” का दावा नहीं किया जा सकता। वे शिक्षक जिन्हें पदोन्नति या स्थानांतरण के माध्यम से HSST (Junior) बनाया गया था, उनके पास पहले से लंबे समय का पूर्णकालिक शिक्षण अनुभव था।
कोर्ट ने कहा कि वेतन समानता तय करते समय भर्ती का स्रोत, योग्यता, अनुभव, नियुक्ति का तरीका और जिम्मेदारियों सहित सभी प्रासंगिक पहलुओं को देखा जाना चाहिए। पीठ ने “समान कार्य के लिए समान वेतन” सिद्धांत के यांत्रिक प्रयोग से बचने पर जोर दिया।
सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच के फैसले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए सभी अपीलें खारिज कर दीं।
केस: G.P. Sangeetha & Ors. v. State of Kerala & Ors.
Citation: 2026 INSC 1004
