रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू की अध्यक्षता में आज जल संसाधन विभाग स्थित प्रार्थना सभाकक्ष में जनसुनवाई आयोजित की गई। इस दौरान महिला उत्पीड़न और महिला संबंधी शिकायतों से जुड़े कुल 13 प्रकरणों की सुनवाई हुई। आयोग की अध्यक्ष ने दोनों पक्षों की समस्याएं और उनके पक्ष सुने तथा प्रकरणों की स्थिति के अनुसार आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।
जनसुनवाई के दौरान एक मामले में आवेदिका और अनावेदक दोनों उपस्थित हुए। दोनों पक्षों ने आपसी मतभेद समाप्त कर सहमति से साथ रहने का निर्णय लिया और भविष्य में विवाद नहीं करने पर भी सहमति जताई। आपसी समझौते के बाद आयोग ने प्रकरण को नस्तीबद्ध करने की कार्रवाई की।
एक अन्य मामले में भरण-पोषण से संबंधित शिकायत पर आवेदिका उपस्थित हुईं, जबकि अनावेदक अनुपस्थित रहा। बताया गया कि मामला न्यायालय में लंबित है। दूसरी पत्नी से जुड़े विषय के सामने आने पर आयोग ने आवेदिका के अधिवक्ता से आवश्यक चर्चा कर मामले को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने की बात कही। अनावेदक के मुंगेली जिले में वर्ग-2 शिक्षक के पद पर कार्यरत होने की जानकारी के आधार पर शिक्षा विभाग, मुंगेली को आवश्यक पत्र भेजने के निर्देश भी दिए गए।
एक अन्य प्रकरण में आवेदिका उपस्थित हुईं, जबकि अनावेदक सुनवाई में नहीं पहुंचा। आयोग ने दूरभाष के माध्यम से अनावेदक से संपर्क किया। उसने सुनवाई की तारीख को लेकर गलतफहमी होने की जानकारी दी। आयोग ने मामले को आगामी सुनवाई के लिए निर्धारित कर दिया।
इसी तरह एक प्रकरण में आवेदिका की सुपुत्री आयोग के समक्ष उपस्थित हुईं और आवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि अगली सुनवाई में आवेदिका स्वयं उपस्थित होंगी। आयोग ने प्रकरण को आगामी सुनवाई के लिए रखा।
एक अन्य मामले में आवेदिका अनुपस्थित रहीं, जबकि अनावेदकगण उपस्थित हुए। आयोग ने आवेदिका से फोन पर संपर्क किया और निर्धारित समय तक उनके उपस्थित नहीं होने पर अनावेदकगण का पक्ष सुना। अनावेदकगण ने आवेदिका द्वारा विभिन्न स्थानों पर की गई शिकायतों सहित अन्य तथ्यों की जानकारी आयोग के समक्ष रखी।
इस प्रकरण में धर्म परिवर्तन से संबंधित विषय भी सामने आया। आयोग ने संबंधित सिविल लाइन थाना से आवश्यक जानकारी प्राप्त करने और मामले में नियमानुसार उचित कार्रवाई करने के निर्देश दिए। साथ ही आगामी सुनवाई में आवेदिका को उपस्थित होने के लिए बुलाने तथा अनावेदकगण को नहीं बुलाने का निर्णय लिया गया।
जनसुनवाई के दौरान आयोग ने संबंधित पक्षों की परिस्थितियों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मामलों की सुनवाई की तथा आवश्यक कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को निर्देशित किया।
