सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से कक्षा 6 में तीन भाषा नीति 2027 तक टालने पर विचार करने को कहा

Supreme Court of India

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने आज केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) से कक्षा 6 के विद्यार्थियों के लिए अनिवार्य तीन-भाषा नीति को वर्ष 2027 के शैक्षणिक सत्र तक स्थगित करने पर विचार करने को कहा है। अदालत ने कहा कि नीति लागू करने में थोड़ी देरी से विद्यार्थियों को नए व्यवस्था में सहजता से ढलने का अवसर मिल सकता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं, ने CBSE को सुझाव दिया कि कक्षा 6 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य करने की व्यवस्था को 2027 के शैक्षणिक सत्र से लागू करने पर विचार किया जाए। पीठ ने विद्यार्थियों की सुविधा और संक्रमण अवधि को ध्यान में रखते हुए यह सुझाव दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जो विद्यार्थी वर्तमान शैक्षणिक सत्र में ही तीन भाषाओं का अध्ययन करना चाहते हैं, उन्हें ऐसा करने की अनुमति दी जानी चाहिए। यानी इच्छुक छात्रों के लिए तीन भाषा पढ़ने का विकल्प खुला रखा जा सकता है, जबकि अनिवार्यता को आगे बढ़ाने पर विचार किया गया है।

CBSE की तीन-भाषा नीति राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप है। इसके तहत विद्यार्थियों को तीन भाषाओं का अध्ययन करना होगा, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं होना आवश्यक है। CBSE के दिशा-निर्देशों के अनुसार विदेशी भाषाओं को तीसरी या चौथी भाषा के रूप में चुना जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट का यह सुझाव ऐसे समय आया है जब नई भाषा व्यवस्था को लेकर विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए संक्रमण संबंधी चिंताएं सामने आ रही हैं। अदालत का जोर इस बात पर है कि नई नीति लागू करते समय छात्रों पर अचानक अतिरिक्त शैक्षणिक दबाव न पड़े और उन्हें व्यवस्था के अनुरूप तैयार होने के लिए पर्याप्त समय मिले।