मांग साबित किए बिना भ्रष्टाचार का दोष सिद्ध नहीं, पटवारी और पुत्र बरी: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट

JUSTICE SANJAY AGRAWAL, JUDGE HIGH COURT OF CHHATTISGARH

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि रिश्वत मांगने का आरोप केवल धन की बरामदगी के आधार पर सिद्ध नहीं किया जा सकता। अदालत ने स्पष्ट किया कि भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दोषसिद्धि के लिए अवैध रिश्वत की मांग और उसकी स्वीकृति का ठोस एवं वैध साक्ष्य होना अनिवार्य है।

न्यायमूर्ति संजय एस. अग्रवाल की एकलपीठ ने वर्ष 2006 में विशेष न्यायालय द्वारा पटवारी रेखराम पटनवार और उनके पुत्र योगेंद्र कुमार को सुनाई गई सजा को निरस्त करते हुए दोनों को बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि शिकायतकर्ता की गवाही और कथित ऑडियो रिकॉर्डिंग में रिश्वत मांगने का आरोप सिद्ध नहीं होता। साथ ही, ऑडियो रिकॉर्डिंग के साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-बी के तहत आवश्यक प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत नहीं किया गया था, जिससे वह इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के रूप में स्वीकार्य नहीं रही।

हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के बी. जयराज बनाम आंध्र प्रदेश राज्य तथा अनवर पी.वी. बनाम पी.के. बशीर मामलों का हवाला देते हुए कहा कि “रिश्वत की मांग सिद्ध होना भ्रष्टाचार के अपराध का अनिवार्य तत्व है।” मांग सिद्ध नहीं होने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 7 एवं 13 के तहत दोषसिद्धि टिक नहीं सकती। इसी आधार पर अदालत ने दोनों आरोपियों को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।