सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व RPF अधिकारी भारत राज मीणा को भ्रष्टाचार के मामलों में किया बरी, रिश्वत की मांग और स्वीकार करना साबित नहीं

Supreme Court of India

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के पूर्व डिविजनल सिक्योरिटी कमिश्नर भारत राज मीणा को CBI द्वारा दर्ज दो भ्रष्टाचार मामलों में सभी आरोपों से बरी कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि अभियोजन पक्ष रिश्वत की मांग और उसकी स्वैच्छिक स्वीकृति को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा।

न्यायमूर्ति नोंगमईकापम कोटिस्वर सिंह और न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता की पीठ ने केरल हाईकोर्ट के 24 मई 2024 के फैसलों को रद्द करते हुए भारत राज मीणा की दोनों अपीलों को स्वीकार कर लिया। ये मामले एर्नाकुलम स्थित विशेष CBI अदालत के फैसलों से संबंधित थे।

CBI का आरोप था कि वर्ष 2005 में पलक्कड़ RPF डिविजन के प्रमुख रहते हुए मीणा के स्तर पर तबादले और पोस्टिंग के लिए अवैध धन लेने की व्यवस्था संचालित की जा रही थी। अभियोजन के अनुसार, दो RPF कर्मी, कांस्टेबल अनंता नारायणन और हेड कांस्टेबल अब्दुल गफूर, कथित तौर पर मध्यस्थ के रूप में काम करते थे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भ्रष्टाचार के मामले में केवल रिश्वत की रकम बरामद होना दोषसिद्धि के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को पहले यह साबित करना आवश्यक है कि आरोपी ने रिश्वत की मांग की थी और उसे स्वीकार भी किया था। इन बुनियादी तथ्यों के साबित होने के बाद ही भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 20 के तहत कानूनी अनुमान लागू किया जा सकता है।

पीठ ने C.M. Girish Babu, B. Jayaraj, P. Satyanarayana Murthy और संविधान पीठ के फैसले Neeraj Dutta सहित पूर्व निर्णयों का उल्लेख करते हुए इस सिद्धांत को दोहराया।

अदालत ने पाया कि मुख्य मध्यस्थ अनंता नारायणन की गवाही से भारत राज मीणा की ओर से रिश्वत की मांग और स्वीकार किए जाने की बात स्पष्ट रूप से स्थापित नहीं होती। उसकी गवाही की स्वतंत्र पुष्टि भी पर्याप्त रूप से नहीं हो सकी। इसके अलावा, मध्यस्थ की गवाही और ट्रैप गवाहों के बयानों में महत्वपूर्ण विरोधाभास पाए गए।

कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध साक्ष्यों में ऐसी कमियां थीं, जिनसे वास्तविक और गंभीर संदेह पैदा होता है। अदालत ने कहा कि आरोपों को “संदेह से परे प्रमाणित किए जाने की निश्चितता” के स्तर तक साबित नहीं किया जा सका।

मीणा ने अपने बयान में यह भी आरोप लगाया था कि उनके खिलाफ कार्रवाई एक प्रतिद्वंद्वी अधिकारी की साजिश का परिणाम थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने साक्ष्यों के आधार पर ही अभियोजन का मामला असफल मानते हुए इस दलील और अभियोजन स्वीकृति को लेकर उठाई गई अलग चुनौती पर निर्णय देना आवश्यक नहीं समझा।

दोनों अपीलों को मंजूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भारत राज मीणा को दोनों मामलों में सभी आरोपों से बरी कर दिया। उनके जमानत बांड समाप्त कर दिए गए और जमा की गई जुर्माने की राशि वापस करने का निर्देश दिया गया।