अनुसूचित जनजाति (एसटी) प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को लेकर उत्पन्न भ्रम को दूर करने के लिए केंद्र सरकार के जनजातीय कार्य मंत्रालय ने महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण जारी किया है। इस संबंध में छत्तीसगढ़ शासन के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देश भेजते हुए कहा है कि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
राज्य सरकार द्वारा जारी पत्र के अनुसार, संसद में हुई चर्चाओं के दौरान यह मामला सामने आया था कि कुछ स्थानों पर ऐसे व्यक्तियों को भी अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्र जारी किए जाने की शिकायतें मिली हैं, जो वास्तव में अधिसूचित जनजाति समुदाय से संबंधित नहीं हैं। इसके अलावा कई राज्यों में अनुसूचित जनजातियों की सूची में एक ही प्रविष्टि के अंतर्गत एक से अधिक समुदायों के नाम दर्ज होने के कारण प्रमाणपत्र जारी करने वाली एजेंसियों के बीच भ्रम की स्थिति बन रही थी।
जनजातीय कार्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि यदि अनुसूचित जनजातियों की अधिसूचित सूची में किसी एक प्रविष्टि के अंतर्गत एक से अधिक समुदायों के नाम दर्ज हैं, तो सूची में सबसे पहले उल्लिखित समुदाय को मुख्य जनजाति माना जाएगा। इसके बाद दर्ज अन्य नाम उप-जनजाति, उप-समूह, पर्यायवाची अथवा उच्चारण संबंधी भिन्नताएं मानी जाएंगी। ऐसे सभी समुदाय उसी अधिसूचित जनजाति प्रविष्टि का हिस्सा समझे जाएंगे।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि किसी समुदाय का नाम अनुसूचित जनजाति सूची में स्वयं, पर्यायवाची नाम, उप-जनजाति, समूह या मान्य उच्चारण भिन्नता के रूप में दर्ज है, तो सामान्यतः उससे किसी अन्य समुदाय के साथ सांस्कृतिक समानता या सांस्कृतिक संबंध का अलग से प्रमाण मांगना आवश्यक नहीं होगा। हालांकि संबंधित सक्षम प्राधिकारी को यह सुनिश्चित करना होगा कि आवेदक का दावा वास्तविक है और वह वास्तव में उस समुदाय से संबंधित है जिसे संबंधित राज्य या केंद्रशासित प्रदेश में अनुसूचित जनजाति के रूप में अधिसूचित किया गया है।
छत्तीसगढ़ सरकार ने सामान्य प्रशासन विभाग के माध्यम से प्राप्त इस केंद्रीय पत्र को सभी संभागायुक्तों, जिला कलेक्टरों तथा राजस्व अधिकारियों को भेजते हुए निर्देश दिया है कि अनुसूचित जनजाति प्रमाणपत्रों के निर्गमन एवं सत्यापन की प्रक्रिया में इन दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन किया जाए। इसका उद्देश्य पात्र जनजातीय समुदायों को प्रमाणपत्र जारी करने की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और विवादमुक्त बनाना है।
