रायपुर जिला न्यायालय का फैसला: किशोरी से दुष्कर्म के दोषी को 12 वर्ष का कारावास, 5 लाख रुपये क्षतिपूर्ति का आदेश

The Rajpatra Law

रायपुर जिला न्यायालय की चतुर्थ फास्ट ट्रैक विशेष अदालत ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर किशोरी से दुष्कर्म करने के मामले में आरोपी शुभम शुक्ला (23) को दोषी ठहराते हुए 12 वर्ष के सश्रम कारावास और 500 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने पीड़िता को 5 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति राशि देने का भी आदेश दिया है।

अपर सत्र न्यायाधीश एवं फास्ट ट्रैक विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) गिरीश कुमार मंडावी ने यह निर्णय सुनाया। आरोपी मध्य प्रदेश के मऊगंज जिले का निवासी है और घटना के समय रायपुर के अमलीडीह स्थित बरडिया विहार में किराये के मकान में रह रहा था।

अभियोजन के अनुसार, पीड़िता 23 जून 2024 को अपने रिश्तेदार के साथ रोजगार की तलाश में रायपुर आई थी। रेलवे स्टेशन पर उसकी मुलाकात दो युवकों से हुई, जिन्होंने उसे नौकरी दिलाने का भरोसा देकर अमलीडीह स्थित एक मकान में ठहराया। अगले दिन पीड़िता के रिश्तेदार के काम पर चले जाने के बाद आरोपी शुभम शुक्ला ने कमरे में घुसकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।

घटना की जानकारी पीड़िता ने अपने परिजनों को दी, जिसके बाद 25 जून 2024 को न्यू राजेंद्र नगर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई। पुलिस ने दुष्कर्म और पॉक्सो अधिनियम के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू की तथा आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।

विचारण के दौरान अदालत ने पाया कि आरोपी ने नौकरी दिलाने का झांसा देकर पीड़िता और उसके रिश्तेदार का विश्वास अर्जित किया तथा पीड़िता के अकेले होने का लाभ उठाकर अपराध को अंजाम दिया। न्यायालय ने आरोपी को भारतीय दंड संहिता की धारा 376(1) के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई। हालांकि, पॉक्सो अधिनियम की धारा 4(1) के आरोप में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया गया।