जयपुर पोलो ग्राउंड पर केंद्र सरकार का कब्जा, कोर्ट ने IPA को अंतरिम राहत देने से किया इनकार

The Rajpatra

नई दिल्ली के प्रतिष्ठित रेस कोर्स क्षेत्र स्थित जयपुर पोलो ग्राउंड पर केंद्र सरकार ने आधिकारिक रूप से कब्जा कर लिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने इंडियन पोलो एसोसिएशन (IPA) को बेदखली आदेश के खिलाफ कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।

अवकाशकालीन न्यायाधीश धीरेंद्र राणा ने 12 जून को सुनवाई के दौरान कहा कि वह 20 मई 2026 को जारी बेदखली आदेश के क्रियान्वयन पर रोक लगाने के पक्ष में नहीं हैं। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि इसी प्रकार की राहत पहले प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा भी अस्वीकार की जा चुकी है। न्यायिक अनुशासन और मर्यादा के सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने आदेश के क्रियान्वयन को रोकने का कोई आधार नहीं पाया।

मामला लुटियंस दिल्ली स्थित बहु-एकड़ जयपुर पोलो ग्राउंड से जुड़ा है, जिसे लंबे समय से इंडियन पोलो एसोसिएशन संचालित कर रही थी। केंद्र सरकार ने सार्वजनिक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत कार्रवाई करते हुए दावा किया कि यह भूमि सार्वजनिक और रक्षा संबंधी आवश्यकताओं के लिए चाहिए।

अदालत से राहत न मिलने के बाद भूमि एवं विकास कार्यालय (L&DO) के माध्यम से केंद्र सरकार ने संपत्ति का कब्जा अपने हाथ में ले लिया। परिसर में नोटिस भी लगाए गए, जिनमें स्पष्ट किया गया कि यह भूमि भारत सरकार की संपत्ति है और किसी भी प्रकार का अनधिकृत कब्जा, अतिक्रमण, निर्माण गतिविधि या अन्य गैरकानूनी उपयोग कानूनी कार्रवाई को आमंत्रित करेगा।

IPA ने सार्वजनिक परिसर अधिनियम की धारा 9 के तहत बेदखली आदेश को चुनौती देते हुए अपील दायर की थी और अपील के निस्तारण तक आदेश के क्रियान्वयन पर रोक की मांग की थी। एसोसिएशन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अक्षय माखीजा ने सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने का विरोध किया और अदालत से बेदखली कार्रवाई रोकने का अनुरोध किया।

वहीं केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय सरकारी स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने अपील और स्थगन आवेदन पर जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। उन्होंने तर्क दिया कि IPA के पक्ष में कोई वैध पट्टा वर्तमान में प्रभावी नहीं है और अंतरिम राहत देने का कोई आधार नहीं बनता।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 20 मई को पारित बेदखली आदेश के खिलाफ अपील 3 जून को दायर की गई थी, लेकिन न तो अपीलीय अदालत और न ही दिल्ली हाईकोर्ट ने इसके क्रियान्वयन पर रोक लगाई थी। अदालत ने यह भी ध्यान में रखा कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 8 जून को याचिका का निपटारा करते हुए कोई अंतरिम संरक्षण नहीं दिया था और अंतरिम राहत का प्रश्न अपीलीय अदालत पर छोड़ दिया था।

इन परिस्थितियों में पटियाला हाउस कोर्ट ने बेदखली आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया और केंद्र सरकार को अपील तथा स्थगन आवेदन पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। मामले की अगली सुनवाई 17 जून 2026 को निर्धारित की गई है।