बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने 374.620 किलोग्राम गांजा बरामदगी के मामले में दोषसिद्ध आरोपी मोहम्मद अब्दुल शकूर को बरी कर दिया है। जस्टिस नरेश कुमार चंद्रवंशी की एकलपीठ ने पाया कि जब्त गांजे की पैकेजिंग, मालखाने के रिकॉर्ड और फॉरेंसिक जांच के लिए भेजे गए नमूने की अभिरक्षा को लेकर गंभीर विसंगतियां थीं।
कोर्ट ने विशेष रूप से नमूना भेजने और एफएसएल में प्राप्त होने के बीच छह दिन के अंतर का उल्लेख किया। अभियोजन यह स्पष्ट नहीं कर सका कि इस अवधि में नमूना कहां और किसकी अभिरक्षा में था। नमूना ले जाने वाले पुलिस कांस्टेबल को भी गवाही के लिए पेश नहीं किया गया।
हाईकोर्ट ने माना कि गांजे के नमूने की पहचान और सुरक्षित अभिरक्षा की कड़ी संदेह से परे साबित नहीं हुई। इसी आधार पर कोर्ट ने एनडीपीएस एक्ट की धारा 20(b)(ii)(C) के तहत मिली 10 साल की सजा रद्द करते हुए आरोपी को संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया। यदि वह किसी अन्य मामले में आवश्यक नहीं है, तो उसे तत्काल रिहा करने तथा जमा जुर्माना वापस करने का निर्देश दिया गया।
