प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक सेवा में अपने 25 वर्ष पूरे कर लिए हैं। उनकी सार्वजनिक सेवा यात्रा को सरकार के मंत्र “जन सेवा से देश सेवा” से जोड़कर देखा जा रहा है। सरकार ने इसी दृष्टिकोण के तहत वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए समावेशी विकास, सामाजिक सशक्तीकरण और सुशासन पर जोर दिया है। इसी दिशा में जन विश्वास कानून को भारत की नियामक व्यवस्था को सरल, व्यावहारिक और व्यवसाय के अनुकूल बनाने वाली पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
भारत में लंबे समय तक कई कानूनों के अंतर्गत छोटी प्रक्रियात्मक गलतियों, तकनीकी चूकों और मामूली अनुपालन संबंधी उल्लंघनों के लिए भी आपराधिक दंड का प्रावधान था। इनमें से कई प्रावधान पुराने नियामक ढांचे पर आधारित थे। समय के साथ यह आवश्यकता महसूस की गई कि मामूली गलतियों और गंभीर कानूनी उल्लंघनों के बीच अंतर किया जाए तथा दंड को उल्लंघन की प्रकृति और गंभीरता के अनुरूप बनाया जाए।
इसी उद्देश्य से केंद्र सरकार ने विभिन्न केंद्रीय कानूनों में प्रावधानों की समीक्षा और सुधार की प्रक्रिया शुरू की। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अधिनियम, 2023 था। इसके माध्यम से कई केंद्रीय कानूनों में निर्धारित कुछ छोटे अपराधों के लिए आपराधिक दंड समाप्त करने की व्यवस्था की गई। इस सुधार का उद्देश्य मामूली प्रक्रियात्मक चूक के कारण आपराधिक मुकदमे का सामना करने की आशंका को कम करना और अनुपालन व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाना था।
सरकार ने इस सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 प्रस्तुत किया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, संसद ने इस विधेयक को अप्रैल 2026 में पारित किया। इसके अधिनियम बनने के बाद विभिन्न केंद्रीय कानूनों के अंतर्गत 1,000 से अधिक अपराधों और उल्लंघनों से संबंधित प्रावधानों को युक्तिसंगत बनाने की दिशा में कदम उठाए गए। इस प्रक्रिया में पुराने, अप्रासंगिक और अनावश्यक प्रावधानों की समीक्षा तथा दंड व्यवस्था में संशोधन शामिल हैं।
इन सुधारों का प्रमुख उद्देश्य नागरिकों, उद्यमियों और व्यवसायों पर अनावश्यक कानूनी बोझ को कम करना है। निर्दिष्ट मामूली उल्लंघनों के लिए आपराधिक दंड के स्थान पर अधिक उपयुक्त दंडात्मक या नियामक उपाय अपनाने से अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाने और स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करने की अपेक्षा की जाती है।
जन विश्वास पहल सरकार के व्यापक प्रशासनिक सुधार कार्यक्रम का भी हिस्सा है। स्वतंत्रता दिवस, 2025 के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि सरकार ने 40,000 से अधिक अनावश्यक अनुपालनों को समाप्त किया है और 1,500 से अधिक अप्रचलित कानूनों को भी हटाया है।
वर्ष 2026 के विधेयक के पारित होने के बाद केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस कानून को वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की दिशा में देश की यात्रा का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बताया।
जन विश्वास सुधार भारत की कानूनी और नियामक व्यवस्था को आधुनिक बनाने की व्यापक प्रक्रिया को दर्शाते हैं। इनके पीछे प्रमुख विचार यह है कि प्रत्येक तकनीकी या प्रक्रियात्मक चूक को आपराधिक अपराध मानने के बजाय उल्लंघन की गंभीरता, उससे उत्पन्न जोखिम और उसके प्रभाव के आधार पर उचित कार्रवाई की जाए।
हालांकि, इन सुधारों की वास्तविक प्रभावशीलता उनके प्रभावी क्रियान्वयन, स्पष्ट अनुपालन नियमों और गंभीर उल्लंघनों के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई पर निर्भर करेगी। मामूली त्रुटियों के लिए अनावश्यक आपराधिक कार्रवाई कम करने के साथ-साथ कानून के गंभीर उल्लंघनों के लिए जवाबदेही बनाए रखना भी आवश्यक है।
इस प्रकार, जन विश्वास अधिनियम का व्यापक उद्देश्य भारत में व्यवसाय करने की प्रक्रिया को सरल बनाना, प्रशासनिक दक्षता में सुधार करना और नागरिकों तथा उद्यमियों के लिए अधिक व्यावहारिक नियामक वातावरण तैयार करना है। सरकार की इस पहल को विकसित भारत 2047 के दीर्घकालिक लक्ष्य से जोड़कर देखा जा रहा है।
