सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (CESTAT) ने इंडियन बैंक को महत्वपूर्ण राहत प्रदान करते हुए सेवा कर से जुड़े करोड़ों रुपये के कर दावों को निरस्त कर दिया है। न्यायाधिकरण ने कहा कि विभाग द्वारा विस्तारित सीमा अवधि (Extended Period of Limitation) का उपयोग कानूनसम्मत नहीं था, क्योंकि बैंक द्वारा किसी तथ्य को छिपाने या कर चोरी के उद्देश्य से कोई जानबूझकर कार्रवाई किए जाने का प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
न्यायमूर्ति पी. दिनेशा (न्यायिक सदस्य) और वासा शेषागिरि राव (तकनीकी सदस्य) की द्विसदस्यीय पीठ ने 18 जून 2026 को अपना अंतिम आदेश पारित करते हुए इंडियन बैंक की अपीलें स्वीकार कर लीं तथा विभाग की अपीलों को खारिज कर दिया। मामला सेवा कर, सेनवेट क्रेडिट तथा विभिन्न बैंकिंग सेवाओं से संबंधित कथित कर देनदारियों को लेकर था।
विवाद की शुरुआत तब हुई जब केंद्रीय उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर विभाग ने वर्ष 2005-06 से 2010-11 के बीच विभिन्न अवधियों के लिए इंडियन बैंक पर सेवा कर की कथित कम अदायगी, सेवा कर न चुकाने, सेनवेट क्रेडिट के गलत उपयोग तथा अनुपातिक क्रेडिट रिवर्सल न करने जैसे आरोप लगाते हुए कई कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। इन नोटिसों में विदेशी मुद्रा लेनदेन से अर्जित आय, टर्नओवर कमीशन, अरेंजमेंट फीस, आयातित सेवाओं पर टीडीएस की गणना, बीएसएनएल सेवाओं पर इनपुट क्रेडिट तथा नियम 6(3A) के तहत सेनवेट क्रेडिट रिवर्सल जैसे मुद्दे शामिल थे।
बैंक की ओर से यह तर्क दिया गया कि वह एक सार्वजनिक क्षेत्र का बैंक है, जिसकी गतिविधियों पर भारतीय रिजर्व बैंक तथा सरकार की निरंतर निगरानी रहती है। बैंक ने कहा कि सभी लेनदेन उसके वैधानिक अभिलेखों में दर्ज थे और विभागीय ऑडिट के दौरान भी उपलब्ध कराए गए थे। इसलिए तथ्यों को छिपाने या कर चोरी का कोई प्रश्न ही नहीं उठता। बैंक ने यह भी कहा कि विवाद मुख्यतः कानून की व्याख्या से संबंधित था और केवल विभाग की भिन्न कानूनी राय को तथ्यों के दमन के रूप में नहीं माना जा सकता।
मामले में टर्नओवर कमीशन को लेकर बैंक ने दावा किया कि यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सरकारी कार्य करने के बदले प्राप्त होती है और अधिसूचना संख्या 22/2006-एसटी दिनांक 31 मार्च 2006 के तहत ऐसी सेवाएं सेवा कर से मुक्त थीं। अरेंजमेंट शुल्क के संबंध में बैंक का कहना था कि यह वास्तव में निर्यात ऋण पर नकारात्मक ब्याज अंतर (Negative Spread) की भरपाई के लिए लिया गया ब्याज था, जिसे सेवा कर मूल्यांकन नियमों के तहत कर योग्य मूल्य से बाहर रखा गया है।
सेनवेट क्रेडिट विवाद में बैंक ने कहा कि भारतीय स्टेट बैंक एक कंसोर्टियम ऋण व्यवस्था में लीड लेंडर था और उससे प्राप्त सेवाओं पर चुकाए गए सेवा कर का इनपुट क्रेडिट लेना वैध था। बीएसएनएल के बिलों पर इनपुट क्रेडिट के मामले में भी बैंक ने तर्क दिया कि सेवा कर सहित पूरा भुगतान पहले किया गया था और बाद में आंशिक राशि वापस होने से पहले से लिए गए वैध क्रेडिट को अवैध नहीं माना जा सकता।
न्यायाधिकरण ने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद पाया कि विभाग यह साबित नहीं कर सका कि बैंक ने किसी तथ्य को जानबूझकर छिपाया था। पीठ ने कहा कि बैंक के सभी लेनदेन नियमित खातों में दर्ज थे और भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा-निर्देशों के अनुरूप संचालित किए गए थे। आदेश में न्यायाधिकरण ने स्पष्ट रूप से कहा कि, “कानून की व्याख्या से जुड़े विवादों में तथ्यों के दमन और कर चोरी के इरादे का आरोप नहीं लगाया जा सकता।” पीठ ने यह भी माना कि केवल विभाग की अलग राय या किसी संभावित त्रुटि के आधार पर विस्तारित सीमा अवधि लागू नहीं की जा सकती।
न्यायाधिकरण ने सर्वोच्च न्यायालय के अनेक निर्णयों, जिनमें Cosmic Dye Chemical, Padmini Products, Chemphar Drugs & Liniments तथा अन्य मामलों का उल्लेख किया, पर भरोसा करते हुए कहा कि विस्तारित सीमा अवधि लागू करने के लिए जानबूझकर तथ्यों को छिपाने का स्पष्ट प्रमाण आवश्यक होता है। ऐसा कोई प्रमाण इस मामले में उपलब्ध नहीं था।
इन निष्कर्षों के आधार पर सीईएसटीएटी ने माना कि संपूर्ण मांग विस्तारित सीमा अवधि का सहारा लेकर उठाई गई थी और जब वही आधार अस्थिर पाया गया, तो पूरा कर दावा स्वतः निरस्त हो जाता है। परिणामस्वरूप न्यायाधिकरण ने मूल आदेश को रद्द कर दिया और इंडियन बैंक की सभी लंबित अपीलों को स्वीकार कर लिया। साथ ही विभाग द्वारा दायर अपीलों को भी खारिज कर दिया गया।
यह निर्णय बैंकिंग क्षेत्र तथा अन्य सार्वजनिक उपक्रमों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आदेश यह स्पष्ट करता है कि जहां करदाता अपने सभी लेनदेन विधिवत अभिलेखों में दर्ज करता है और विवाद केवल कानूनी व्याख्या का हो, वहां विभाग विस्तारित सीमा अवधि का सहारा लेकर वर्षों पुराने कर दावे नहीं उठा सकता। यह फैसला कर प्रशासन में पारदर्शिता, विधिक निश्चितता और करदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण नजीर के रूप में देखा जा रहा है।
