छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और चार्जिंग सुविधाओं का विस्तार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने सभी नगर निगम आयुक्तों और जिला मुख्यालयों के मुख्य नगर पालिका अधिकारियों को निर्देश जारी करते हुए इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग स्टेशन एवं चार्जिंग पॉइंट स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराने को कहा है।
विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत राज्य में इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग अवसंरचना विकसित की जाएगी। योजना के अंतर्गत नगर निगम क्षेत्रों में दोपहिया और चारपहिया इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए लगभग 25 से 30 चार्जिंग स्टेशन अथवा चार्जिंग पॉइंट स्थापित किए जाने का प्रस्ताव है।
राज्य सरकार ने चार्जिंग स्टेशनों के लिए ऐसे स्थानों के चयन पर जोर दिया है जहां पर्याप्त पार्किंग क्षमता उपलब्ध हो और जो आम जनता के लिए आसानी से पहुंच योग्य हों। इसके लिए पार्किंग स्थल, बस स्टैंड, बाजार क्षेत्र और अस्पताल परिसरों जैसे स्थानों को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही चयनित स्थलों पर विद्युत कनेक्शन की उपलब्धता या उसकी निकटता सुनिश्चित करना भी आवश्यक होगा।
निर्देशों में कहा गया है कि शासकीय अथवा नगर निगम स्वामित्व वाली भूमि को प्राथमिकता दी जाए। प्रत्येक प्रस्तावित स्थल के लिए अक्षांश-देशांतर (Latitude-Longitude) सहित कम से कम दो फोटोग्राफ उपलब्ध कराने होंगे। इसके अलावा प्रत्येक स्थल पर लगभग 800 वर्गफुट भूमि उपलब्ध होना और विद्युत कनेक्शन प्रदान किया जाना संभव होना चाहिए।
योजना के तहत प्रत्येक चार्जिंग स्टेशन की न्यूनतम क्षमता 144 किलोवाट निर्धारित की गई है। नगर निगम श्रेणी ‘बी’ के अंतर्गत स्थापित होने वाले चार्जिंग स्टेशनों के लिए विद्युत अधोसंरचना लागत का 80 प्रतिशत तथा चार्जिंग मशीन और उपकरणों की लागत का 70 प्रतिशत तक अनुदान भारत सरकार द्वारा दिए जाने का प्रस्ताव है।
नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने संबंधित नगर निगमों को निर्देश दिया है कि वे जिला कलेक्टरों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक वित्तीय संसाधनों और व्यवस्थाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करें। साथ ही किसी भी स्थल के चयन से पहले उसकी व्यवहार्यता और उपयोगिता का परीक्षण करना भी अनिवार्य होगा। विभाग का मानना है कि इस पहल से राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा और पर्यावरण अनुकूल परिवहन व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
