छत्तीसगढ़ राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में सहकारी साख समिति की अपील खारिज करते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारी सुषमा सरनाइक के पक्ष में जिला उपभोक्ता आयोग के आदेश को बरकरार रखा है। आयोग ने कहा कि वर्ष 2011 में ऋण खाते का पूरा भुगतान मानकर एनओसी जारी करने के बाद वर्ष 2020 में कथित बकाया ऋण के नाम पर उपभोक्ता के खाते से ₹78,415 रोकना अवैध है और यह सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।
मामले के अनुसार सुषमा सरनाइक ने छत्तीसगढ़ सहकारी साख समिति से ऋण लिया था, जिसका भुगतान होने के बाद समिति ने 4 अप्रैल 2011 को एनओसी जारी कर दी थी। सेवानिवृत्ति के बाद जब उन्होंने अपने खाते में जमा राशि की मांग की तो समिति ने ₹78,415 रोकते हुए पुराने ऋण का बकाया होने का दावा किया। जिला उपभोक्ता आयोग ने राशि लौटाने, ₹5,000 मानसिक क्षतिपूर्ति तथा ₹5,000 वाद व्यय देने का आदेश दिया था।
राज्य आयोग ने कहा कि एक बार ऋण खाता बंद कर एनओसी जारी किए जाने के बाद वर्षों बाद उसी ऋण के आधार पर राशि रोकना उचित नहीं है। आयोग ने जिला आयोग के आदेश को सही ठहराते हुए सहकारी समिति की अपील खारिज कर दी। यह फैसला उपभोक्ताओं और सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकारों की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
