नई दिल्ली: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2023 के टॉपर्स को लेकर किए गए विज्ञापनों पर केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) ने प्रतिष्ठित कोचिंग संस्थान वाजीराम एंड रवि IAS स्टडी सेंटर LLP को भ्रामक विज्ञापन का दोषी ठहराया है। प्राधिकरण ने कहा कि संस्थान ने सफल अभ्यर्थियों के नाम और तस्वीरों का इस्तेमाल करते हुए यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने वास्तव में संस्थान का कौन-सा कोर्स किया था। इस तरह महत्वपूर्ण जानकारी छिपाकर संभावित छात्रों को गुमराह किया गया, जो उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 और भ्रामक विज्ञापनों की रोकथाम एवं समर्थन संबंधी दिशा-निर्देश, 2022 का उल्लंघन है। यह आदेश 29 मई 2026 को पारित किया गया।
सीसीपीए ने यह मामला स्वतः संज्ञान लेकर शुरू किया था। जांच में पाया गया कि संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर UPSC CSE 2023 के परिणाम आने के बाद “टॉप 10 में 8 रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं”, “हर वर्ष UPSC में चयनित 30 प्रतिशत से अधिक अधिकारी वाजीराम एंड रवि के छात्र हैं” तथा “टॉप 50 में 37 रैंक धारक वाजीराम एंड रवि से हैं” जैसे प्रमुख दावे प्रकाशित किए गए थे। इन्हीं दावों के साथ वेबसाइट पर विभिन्न दीर्घकालिक और शुल्क आधारित कोर्सों का भी प्रचार किया जा रहा था।
प्रारंभिक जांच के दौरान सीसीपीए ने पाया कि विज्ञापनों में यह नहीं बताया गया कि जिन सफल अभ्यर्थियों को संस्थान अपना छात्र बता रहा है, उन्होंने वास्तव में कौन-सा कोर्स किया था। इससे सामान्य अभ्यर्थियों के मन में यह धारणा बन सकती थी कि सभी सफल उम्मीदवार संस्थान के व्यापक और पूर्णकालिक कोचिंग कार्यक्रमों के विद्यार्थी थे, जबकि वास्तविक स्थिति अलग हो सकती थी।
मामले में नोटिस जारी होने के बाद संस्थान ने अपने जवाब में कहा कि उसने कुल 413 सफल अभ्यर्थियों का विवरण उपलब्ध कराया है। इनमें से 258 अभ्यर्थियों ने केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम में नामांकन कराया था, जबकि 153 छात्रों ने अन्य शुल्क आधारित पाठ्यक्रमों के साथ इंटरव्यू गाइडेंस भी लिया था। संस्थान का तर्क था कि उसके यहां किसी भी चरण में किसी भी कोर्स में नामांकन लेने वाला प्रत्येक अभ्यर्थी उसका छात्र माना जाता है, इसलिए उसके विज्ञापन तथ्यात्मक रूप से सही हैं। साथ ही उसने यह भी बताया कि नोटिस मिलने के बाद वेबसाइट पर आवश्यक संशोधन कर दिए गए थे।
हालांकि, महानिदेशक (जांच) की विस्तृत जांच में सामने आया कि जिन कई अभ्यर्थियों को विज्ञापनों में प्रमुखता से दिखाया गया था, उन्होंने केवल इंटरव्यू गाइडेंस प्रोग्राम लिया था। यह कार्यक्रम उन उम्मीदवारों के लिए होता है जो प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा पहले ही अपने दम पर उत्तीर्ण कर चुके होते हैं। ऐसे उम्मीदवारों को पूर्णकालिक कोचिंग कार्यक्रमों के साथ जोड़कर प्रस्तुत करना और उनके वास्तविक कोर्स का खुलासा न करना संभावित छात्रों को भ्रमित कर सकता है।
सीसीपीए ने अपने आदेश में कहा कि किसी सफल अभ्यर्थी ने कौन-सा कोर्स किया, यह संभावित छात्रों के लिए महत्वपूर्ण सूचना (Material Information) है। यदि यह जानकारी छिपाई जाती है तो छात्र किसी संस्थान की वास्तविक सफलता और उसके पाठ्यक्रमों की प्रभावशीलता के बारे में गलत निष्कर्ष निकाल सकते हैं।
प्राधिकरण ने संस्थान की उस दलील को भी खारिज कर दिया कि UPSC अभ्यर्थी शिक्षित और जागरूक उपभोक्ता होते हैं तथा वे स्वयं दावों की जांच कर सकते हैं। सीसीपीए ने स्पष्ट शब्दों में कहा, “विज्ञापनों को सत्य, पारदर्शी और गैर-भ्रामक बनाना सेवा प्रदाता की वैधानिक जिम्मेदारी है। केवल इस आधार पर कि उपभोक्ता शिक्षित है, इस जिम्मेदारी से बचा नहीं जा सकता।” प्राधिकरण ने यह भी कहा कि “किसी उपभोक्ता से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि वह प्रवेश लेने से पहले विज्ञापन में किए गए प्रत्येक दावे की स्वतंत्र रूप से जांच-पड़ताल करे।”
आदेश में यह भी कहा गया कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर प्रकाशित विज्ञापनों की पहुंच पूरे देश और विदेश तक होती है। वेबसाइट पर स्थान की कोई कमी नहीं होती, इसलिए कोर्स संबंधी पूरी जानकारी आसानी से दी जा सकती थी। ऐसे में महत्वपूर्ण जानकारी का अभाव जानबूझकर किया गया छिपाव माना जाएगा, जिससे बड़ी संख्या में UPSC अभ्यर्थी प्रभावित हो सकते हैं।
सीसीपीए ने निष्कर्ष निकाला कि वाजीराम एंड रवि ने सफल अभ्यर्थियों के वास्तविक पाठ्यक्रम का खुलासा किए बिना अपनी उपलब्धियों को बढ़ा-चढ़ाकर प्रस्तुत किया और महत्वपूर्ण तथ्यों को छिपाकर भ्रामक विज्ञापन प्रकाशित किए। प्राधिकरण ने माना कि यह उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 के तहत उपभोक्ताओं के सूचना प्राप्त करने के अधिकार का उल्लंघन है और भ्रामक विज्ञापन की श्रेणी में आता है।
यह आदेश देशभर के कोचिंग संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यदि कोई संस्थान सफल अभ्यर्थियों के नाम, फोटो या रैंक का उपयोग अपने प्रचार में करता है, तो उसे यह भी स्पष्ट करना होगा कि संबंधित उम्मीदवार ने वास्तव में कौन-सा कोर्स किया था। इससे शिक्षा क्षेत्र में विज्ञापनों की पारदर्शिता बढ़ने और छात्रों को सही जानकारी मिलने की उम्मीद है।
