एक से अधिक राज्यों में मतदाता पंजीकरण मामले में अभिनेता प्रकाश राज को जमानत, बेंगलुरु अदालत ने रद्द किया गैर-जमानती वारंट

The Rajpatra Law

बेंगलुरु की एक अदालत ने अभिनेता और वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में निर्दलीय प्रत्याशी रहे प्रकाश राज को एक आपराधिक मामले में जमानत दे दी है। उन पर आरोप है कि वे विभिन्न राज्यों की कई विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में पंजीकृत थे और लोकसभा चुनाव के दौरान नामांकन पत्र के साथ दाखिल शपथपत्र में इस तथ्य का खुलासा नहीं किया था।

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ज्योति शांतप्पा काले ने प्रकाश राज को 4,000 रुपये की नकद जमानत राशि जमा करने और प्रत्येक सुनवाई की तारीख पर अदालत में उपस्थित रहने की शर्त पर राहत प्रदान की। अदालत ने इससे पहले जारी गैर-जमानती वारंट (एनबीडब्ल्यू) को भी वापस ले लिया। यह इस मामले में जारी किया गया तीसरा गैर-जमानती वारंट था, क्योंकि पूर्व में जारी समन और वारंट की तामील नहीं हो सकी थी तथा प्रकाश राज अदालत में उपस्थित नहीं हुए थे।

प्रकाश राज की ओर से अधिवक्ता नागार्जुन ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल को न तो समन मिला और न ही वारंट की जानकारी दी गई। उन्होंने कहा कि अभिनेता को इस मुकदमे की जानकारी केवल मीडिया रिपोर्टों के माध्यम से हुई। बचाव पक्ष ने यह भी बताया कि तमिलनाडु में जारी उनका मतदाता पहचान पत्र अब सरेंडर किया जा चुका है। वहीं, शिकायतकर्ता की ओर से कहा गया कि आरोपित अपराध असंज्ञेय प्रकृति के हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने जमानत मंजूर करते हुए मुकदमे की सुनवाई कानून के अनुसार जारी रखने का निर्देश दिया।

यह मामला बेंगलुरु निवासी अधिवक्ता के. दिलीप कुमार द्वारा दायर निजी शिकायत पर आधारित है। शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रकाश राज ने जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के प्रावधानों का उल्लंघन करते हुए एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदाता के रूप में अपना नाम दर्ज करा रखा था। 1 अगस्त 2025 को मजिस्ट्रेट ने शिकायत, मौखिक साक्ष्य और दस्तावेजों के आधार पर प्रथम दृष्टया पर्याप्त सामग्री पाते हुए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 और 125ए के तहत संज्ञान लिया था।

प्रकाश राज ने वर्ष 2019 का लोकसभा चुनाव बेंगलुरु सेंट्रल संसदीय क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में लड़ा था। उन्होंने अपने नामांकन पत्र के साथ दाखिल शपथपत्र में केवल बेंगलुरु के शांतिनगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज होने की जानकारी दी थी।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसी समय उनका नाम चेन्नई के वेलाचेरी विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दो स्थानों पर तथा तेलंगाना के सेरिलिंगमपल्ली विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में भी दर्ज था। साथ ही उनके पास कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना के मतदाता पहचान पत्र भी थे।

शिकायत के अनुसार, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 17 और 18 किसी व्यक्ति को एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों अथवा एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक बार मतदाता के रूप में पंजीकृत होने से रोकती हैं। वहीं धारा 31 मतदाता सूची से संबंधित झूठी घोषणा को दंडनीय बनाती है और धारा 125ए चुनावी प्रक्रिया में झूठा शपथपत्र दाखिल करने पर दंड का प्रावधान करती है।

मामले की सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने स्वयं गवाह के रूप में बयान दिया और सात दस्तावेज अदालत के समक्ष प्रस्तुत किए। इनमें प्रकाश राज का नामांकन शपथपत्र, 21 मार्च 2019 का अतिरिक्त शपथपत्र तथा विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूचियों से संबंधित रिकॉर्ड शामिल थे।

रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद मजिस्ट्रेट ने प्रथम दृष्टया माना कि वर्ष 2019 में प्रकाश राज का नाम एक से अधिक मतदाता सूचियों में दर्ज होने के संकेत मिलते हैं, जबकि चुनावी शपथपत्र में केवल शांतिनगर निर्वाचन क्षेत्र का उल्लेख किया गया था। अदालत ने माना कि उपलब्ध सामग्री जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 31 और 125ए के तहत प्रथम दृष्टया मामला स्थापित करती है और आपराधिक मुकदमे की सुनवाई जारी रखने का आदेश दिया।

यह शिकायत सबसे पहले वर्ष 2019 में हलासुरु गेट पुलिस थाने में दर्ज कराई गई थी। पुलिस द्वारा कार्रवाई नहीं किए जाने का आरोप लगाते हुए शिकायतकर्ता ने बाद में बेंगलुरु पुलिस आयुक्त और भारत निर्वाचन आयोग से भी शिकायत की, जिसके बाद मजिस्ट्रेट अदालत में निजी आपराधिक शिकायत दायर की गई।