स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के भिलाई इस्पात संयंत्र अंतर्गत संचालित दल्ली मैकेनाइज्ड माइंस के सिलिका रिडक्शन प्लांट ने 4 जून 2026 को 20 लाख टन संचयी उत्पादन का महत्वपूर्ण मील का पत्थर हासिल कर एक नई उपलब्धि दर्ज की है। लौह अयस्क संसाधनों के अधिकतम और दक्ष उपयोग की दिशा में इसे एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।
सिलिका रिडक्शन प्लांट का उद्घाटन 23 जून 2023 को किया गया था, जबकि इसका वाणिज्यिक उत्पादन अक्टूबर 2023 से शुरू हुआ। संयंत्र ने संचालन शुरू होने के मात्र 563 दिनों के भीतर 7 मई 2025 को 10 लाख टन उत्पादन का आंकड़ा हासिल कर लिया था। इसके बाद अगले 10 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य केवल 393 दिनों में पूरा कर संयंत्र ने अपनी बढ़ती उत्पादकता और उच्च परिचालन दक्षता का परिचय दिया है।
सिलिका रिडक्शन प्लांट, जिसे बेनीफिशिएशन प्लांट भी कहा जाता है, की स्थापना उच्च सिलिका युक्त एक मिलीमीटर से कम आकार के लौह अयस्क फाइंस के उन्नयन के लिए की गई है। अत्याधुनिक बेनीफिशिएशन तकनीक से लैस यह संयंत्र लौह अयस्क में मौजूद सिलिका की मात्रा को कम कर भिलाई इस्पात संयंत्र को उच्च गुणवत्ता वाला लौह अयस्क उपलब्ध करा रहा है।
यह परियोजना सेल की दीर्घकालिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके तहत निम्न श्रेणी के लौह अयस्क संसाधनों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जा रहा है। छह दशक से अधिक पुराने दल्ली-राजहरा खदान क्षेत्र में लौह अयस्क की गुणवत्ता में लगातार आ रही गिरावट को देखते हुए एक मिलीमीटर से कम आकार के लौह अयस्क फाइंस का बेनीफिशिएशन आवश्यक हो गया था, ताकि ब्लास्ट फर्नेस संचालन के लिए अपेक्षित गुणवत्ता का अयस्क उपलब्ध कराया जा सके।
उन्नत गुणवत्ता वाले लौह अयस्क की उपलब्धता से भिलाई इस्पात संयंत्र के ब्लास्ट फर्नेसों में हॉट मेटल उत्पादन क्षमता में सुधार हुआ है। इसके साथ ही कोक की खपत में कमी, फर्नेस दक्षता में वृद्धि और कार्बन उत्सर्जन घटाने में भी यह संयंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सिलिका रिडक्शन प्लांट की यह उपलब्धि न केवल उत्पादन क्षमता में वृद्धि का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण-अनुकूल और सतत इस्पात उत्पादन के प्रति सेल की प्रतिबद्धता को भी मजबूत करती है।
