कोलकाता स्थित सीमा शुल्क, उत्पाद शुल्क एवं सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (CESTAT) ने सड़क और पुल निर्माण कार्य से जुड़ी दो कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए कथित खनिज रॉयल्टी पर लगाए गए सर्विस टैक्स की मांग रद्द कर दी है। न्यायाधिकरण ने कहा कि विभाग यह साबित नहीं कर सका कि कंपनियों को किसी प्रकार का खनन अधिकार या खनन लाइसेंस मिला था, जिसके आधार पर रॉयल्टी भुगतान पर रिवर्स चार्ज मैकेनिज्म के तहत सर्विस टैक्स लगाया जा सके।
मामले में विभाग ने कंपनियों की बैलेंस शीट में दर्ज “रॉयल्टी ऑन मिनरल” मद को आधार बनाकर सर्विस टैक्स की मांग की थी। हालांकि कंपनियों ने बताया कि यह राशि वास्तव में सरकारी विभागों द्वारा फॉर्म-एम और फॉर्म-एन जमा होने तक रोकी गई रकम थी, न कि खनन अधिकार के बदले सरकार को दी गई रॉयल्टी।
न्यायाधिकरण ने रिकॉर्ड पर उपलब्ध दस्तावेजों का परीक्षण करने के बाद पाया कि विवादित राशि केवल रोकी गई भुगतान राशि थी। CESTAT ने कहा कि केवल बैलेंस शीट की प्रविष्टियों के आधार पर कर मांग नहीं बनाई जा सकती और विभाग ने कोई स्वतंत्र या पुष्टिकारी साक्ष्य भी प्रस्तुत नहीं किया। न्यायाधिकरण ने यह भी माना कि मामला समय-सीमा से बाहर था और विस्तारित अवधि लागू करने का कोई ठोस आधार नहीं था। इसके साथ ही दोनों अपीलें स्वीकार करते हुए सर्विस टैक्स, ब्याज और जुर्माने की पूरी मांग रद्द कर दी गई।
