पश्चिम एशिया में परीक्षा रद्द होने से प्रभावित CBSE निजी छात्रों के लिए नीति बनाने पर विचार कर रही केंद्र सरकार: सुप्रीम कोर्ट

Supreme Court of India

पश्चिम एशिया में सुरक्षा परिस्थितियों और क्षेत्रीय संघर्ष के कारण सीबीएसई की कक्षा 12 की परीक्षाएं रद्द होने से प्रभावित निजी छात्रों के हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार नीति बनाने पर विचार कर रही है। केंद्र ने शुक्रवार को यह जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी।

न्यायमूर्ति ए.जी. मसीह और न्यायमूर्ति विजय बिश्नोई की अवकाशकालीन पीठ सऊदी अरब के एक छात्र प्रण्सु जिगरकुमार पटेल द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को कक्षा 12 सुधार परीक्षा (इम्प्रूवमेंट एग्जाम) का परिणाम घोषित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। केंद्र सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए अदालत ने मामले की सुनवाई अगले शुक्रवार तक स्थगित कर दी।

केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह मामला केवल एक छात्र तक सीमित नहीं है, बल्कि पश्चिम एशिया के कई देशों में ऐसे अनेक निजी छात्रों को प्रभावित करता है जिनकी परीक्षाएं सुरक्षा कारणों से आयोजित नहीं हो सकीं। उन्होंने कहा कि सरकार इस विषय का परीक्षण कर रही है और ऐसे मामलों के समाधान के लिए एक व्यापक नीति तैयार करने पर विचार कर रही है।

याचिकाकर्ता प्रण्सु पटेल ने सीबीएसई द्वारा उनका परिणाम घोषित नहीं किए जाने को चुनौती दी है। सीबीएसई ने 13 मई 2026 को कक्षा 12 के परिणाम घोषित किए थे, लेकिन पटेल का परिणाम “रिजल्ट लेटर” (RL) के रूप में रोक दिया गया था।

याचिका के अनुसार, पटेल ने वर्ष 2026 की कक्षा 12 सुधार परीक्षा में सऊदी अरब के अल जुबैल से निजी छात्र के रूप में भाग लिया था। उन्होंने भौतिकी, रसायन विज्ञान, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान विषयों में सुधार परीक्षा के लिए पंजीकरण कराया था। हालांकि, क्षेत्र में बढ़ते तनाव और सुरक्षा चिंताओं के कारण सीबीएसई ने बहरीन, ईरान, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में आयोजित होने वाली कई परीक्षाएं रद्द कर दीं। इसके चलते पटेल केवल भौतिकी और रसायन विज्ञान की परीक्षा दे सके, जबकि गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान की परीक्षाएं रद्द हो गईं।

परीक्षा रद्द होने के बाद सीबीएसई ने 27 मार्च 2026 को एक विशेष मूल्यांकन योजना जारी की थी। इस योजना के तहत लंबित विषयों के लिए छात्रों का मूल्यांकन उनके विद्यालयी रिकॉर्ड के आधार पर किया जाना था। इसमें त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं में प्राप्त अंकों में से सर्वोच्च अंक को आधार बनाकर परिणाम तैयार करने का प्रावधान किया गया था।

याचिकाकर्ता का कहना है कि वह भी उन्हीं परिस्थितियों से प्रभावित छात्र हैं, जिनके लिए यह योजना बनाई गई थी। उनके विद्यालय, इंटरनेशनल इंडियन स्कूल, अल जुबैल के पास त्रैमासिक, अर्धवार्षिक और प्री-बोर्ड परीक्षाओं का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध है, जिसका उपयोग कर सीबीएसई उनका परिणाम घोषित कर सकता है।

पटेल ने यह भी बताया कि परिणाम घोषित न होने के कारण उनकी उच्च शिक्षा प्रभावित हो रही है। उन्होंने धीरूभाई अंबानी विश्वविद्यालय के बी.टेक (कंप्यूटर साइंस एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए आवेदन किया था, लेकिन कक्षा 12 का परिणाम उपलब्ध न होने के कारण वे प्रवेश प्रक्रिया पूरी नहीं कर सके। इसके अलावा अन्य संस्थानों में आवेदन करने के अवसर भी प्रभावित हुए हैं।

याचिका में आरोप लगाया गया है कि विशेष मूल्यांकन योजना मौजूद होने के बावजूद परिणाम घोषित न करना मनमाना, अनुचित और भेदभावपूर्ण है। यह संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि युद्ध जैसी परिस्थितियों और सुरक्षा कारणों से परीक्षा रद्द होने का खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि सीबीएसई को विद्यालयी रिकॉर्ड के आधार पर विशेष मूल्यांकन योजना लागू करते हुए उनका परिणाम घोषित करने का निर्देश दिया जाए। वैकल्पिक रूप से, गणित, अंग्रेजी और कंप्यूटर विज्ञान विषयों की विशेष परीक्षा आयोजित करने का आदेश देने की भी मांग की गई है।