बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि केवल यह कह देना कि कोई खाद्य उत्पाद “मिसब्रांडेड” है, अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि किसी निर्माता के विरुद्ध कार्रवाई की जाती है तो शिकायत में यह स्पष्ट रूप से बताया जाना चाहिए कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 या उसके अंतर्गत बने किस नियम अथवा विनियम का उल्लंघन हुआ है।
न्यायमूर्ति संजय के. अग्रवाल ने एम/एस ज्योति इंडस्ट्रीज बनाम राज्य छत्तीसगढ़ (WPC No. 2855/2021, 2026:CGHC:31775) में यह फैसला सुनाते हुए रायगढ़ के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा दायर शिकायत, अभियोजन स्वीकृति आदेश और संज्ञान आदेश को रद्द कर दिया।
मामले में लिची फ्रूट जूस के नमूने की जांच में उत्पाद “मानकों के अनुरूप” पाया गया था और उसमें किसी प्रकार की मिलावट नहीं मिली थी। हालांकि, उसे “मिसब्रांडेड” बताया गया था। हाईकोर्ट ने पाया कि शिकायत में यह नहीं बताया गया कि पैकेजिंग एवं लेबलिंग विनियम, 2011 के किस प्रावधान का उल्लंघन हुआ है। बाद में राज्य ने जवाब में अधूरे डाक पते को कारण बताया, लेकिन न्यायालय ने कहा कि यह तथ्य मूल शिकायत और संज्ञान आदेश में दर्ज नहीं था।
अदालत ने कहा कि “आरोपी को यह स्पष्ट जानकारी होना आवश्यक है कि उस पर किस कानून या नियम के उल्लंघन का आरोप है। अस्पष्ट आरोपों के आधार पर आपराधिक अभियोजन नहीं चलाया जा सकता।” इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पूरी कार्यवाही निरस्त कर दी।
