केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने एक महत्वपूर्ण आदेश में एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल ऑफ इंडिया (EIC) को निर्देश दिया है कि वह मसालों के विदेशी आयातकों से संबंधित जानकारी मांगने वाले एक आरटीआई आवेदन को संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण को स्थानांतरित करे। आयोग ने यह भी कहा कि आवेदन को समय रहते ट्रांसफर न करना सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अनुरूप नहीं था और इस देरी के लिए विस्तृत स्पष्टीकरण प्रस्तुत किया जाए।
यह मामला जयसूर्या द्वारा दायर एक आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। आवेदक ने अगस्त 2025 में सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत पिछले तीन वर्षों में भारत से हल्दी, लाल मिर्च और सूखी अदरक आयात करने वाले विदेशी खरीदारों की सूची मांगी थी। आवेदन में कंपनियों के नाम, पते, संपर्क विवरण और उनके संचालन वाले देशों की जानकारी उपलब्ध अभिलेखों के आधार पर देने का अनुरोध किया गया था।
एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) ने आवेदन प्राप्त होने के दिन ही उत्तर देते हुए कहा था कि मांगी गई सूचना उनके पास उपलब्ध नहीं है। इस जवाब से असंतुष्ट होकर आवेदक ने प्रथम अपील दायर की, लेकिन प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने भी सीपीआईओ के उत्तर को बरकरार रखा। इसके बाद मामला केंद्रीय सूचना आयोग तक पहुंचा।
सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता उपस्थित नहीं हुआ, जबकि एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल की ओर से उपनिदेशक नितिन वाई. मेश्राम उपस्थित हुए। उन्होंने आयोग को बताया कि मांगी गई जानकारी उनके विभाग के रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है। हालांकि आयोग द्वारा यह पूछे जाने पर कि ऐसी जानकारी किस सरकारी संस्था के पास हो सकती है, उन्होंने बताया कि यह रिकॉर्ड संभवतः स्पाइसेज बोर्ड ऑफ इंडिया के पास उपलब्ध हो सकता है।
मामले की सुनवाई और रिकॉर्ड के अवलोकन के बाद सूचना आयुक्त खुशवंत सिंह सेठी ने पाया कि संबंधित विभाग को आरटीआई आवेदन को केवल “सूचना उपलब्ध नहीं है” कहकर बंद नहीं करना चाहिए था। आयोग ने कहा कि यदि किसी अन्य सार्वजनिक प्राधिकरण के पास मांगी गई सूचना होने की संभावना है, तो सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(3) के तहत आवेदन को उस प्राधिकरण को स्थानांतरित करना आवश्यक है।
आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि संबंधित विभाग को आवेदन उस सार्वजनिक प्राधिकरण को भेजना चाहिए था जो मांगी गई सूचना के विषय से अधिक निकटता से जुड़ा हुआ है। इसी आधार पर आयोग ने एक्सपोर्ट इंस्पेक्शन काउंसिल को निर्देश दिया कि वह 15 दिनों के भीतर आरटीआई आवेदन संबंधित सीपीआईओ को स्थानांतरित करे और इसकी सूचना आयोग को भी दे।
इसके अलावा आयोग ने यह भी पाया कि आवेदन को निर्धारित समय सीमा के भीतर ट्रांसफर नहीं किया गया, जो आरटीआई अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन है। इसलिए विभाग को इस देरी के कारणों पर विस्तृत लिखित स्पष्टीकरण 15 दिनों के भीतर आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।
यह आदेश सूचना के अधिकार कानून के तहत नागरिकों के अधिकारों को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। आयोग ने अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दिया है कि सरकारी विभाग केवल सूचना उपलब्ध न होने का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। यदि सूचना किसी अन्य सरकारी निकाय के पास होने की संभावना है, तो संबंधित विभाग का दायित्व है कि वह आवेदन को उचित प्राधिकरण तक पहुंचाए। इससे आम नागरिकों, व्यापारिक संस्थाओं और शोधकर्ताओं को सूचना प्राप्त करने की प्रक्रिया अधिक सरल और प्रभावी बन सकेगी।
