नई दिल्ली स्थित कस्टम, एक्साइज एवं सर्विस टैक्स अपीलीय न्यायाधिकरण (सीईस्टैट) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में जयपुर एसईजेड इकाई भारती जेम्स, पी पी ज्वेलर्स एंड डायमंड्स प्राइवेट लिमिटेड और अन्य संबंधित पक्षों को बड़ी राहत देते हुए ₹1.44 करोड़ की कस्टम ड्यूटी मांग, जब्ती आदेश और सभी दंडात्मक कार्रवाइयों को रद्द कर दिया है।
कस्टम विभाग ने आरोप लगाया था कि भारती जेम्स ने एसईजेड इकाई होने के कारण बिना शुल्क के आयात किए गए सोने और चांदी को घरेलू बाजार में डायवर्ट कर दिया तथा वास्तविक आभूषणों के बजाय अन्य वस्तुओं का निर्यात सोने-चांदी के आभूषण के रूप में दिखाया। इसी आधार पर विभाग ने कस्टम ड्यूटी की वसूली और विभिन्न धाराओं के तहत पेनल्टी लगाई थी।
हालांकि, सीईस्टैट की पीठ ने पाया कि विभाग अपने आरोपों को ठोस साक्ष्यों से साबित नहीं कर सका। न्यायाधिकरण ने कहा कि एसईजेड अधिकारियों द्वारा स्वीकृत अतिरिक्त बॉन्ड-कम-लीगल अंडरटेकिंग को नजरअंदाज कर यह निष्कर्ष निकालना कि इकाई ने आयात सीमा का उल्लंघन किया, उचित नहीं था। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा स्वीकृति मिलने के बाद इकाई उस स्वीकृति पर भरोसा करके कारोबार करने की हकदार थी।
न्यायाधिकरण ने यह भी माना कि केवल विशेष मशीनों की अनुपस्थिति से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि आभूषणों का निर्माण नहीं हुआ। आदेश में कहा गया कि हाथ से आभूषण बनाना उद्योग में एक स्थापित और पारंपरिक प्रक्रिया है। ट्रिब्यूनल ने विभाग द्वारा कर्मचारियों के बयानों पर निर्भरता को भी खारिज करते हुए कहा कि कस्टम अधिनियम की धारा 138B में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना धारा 108 के तहत दर्ज बयानों को साक्ष्य के रूप में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
सीईस्टैट ने यह भी कहा कि एनएसडीएल डेटा को ही एकमात्र आधार बनाकर निर्माण गतिविधि पर संदेह नहीं किया जा सकता, विशेषकर तब जब कंपनी ने स्टॉक रजिस्टर, खरीद रिकॉर्ड, इनवॉइस और अन्य दस्तावेज प्रस्तुत किए हों। न्यायाधिकरण ने विभाग के इस आरोप को भी अस्वीकार कर दिया कि ड्यूटी-फ्री आयातित सोना-चांदी को घरेलू बाजार में बेचा गया था।
इन निष्कर्षों के आधार पर सीईस्टैट ने माना कि न तो कस्टम ड्यूटी की चोरी सिद्ध हुई और न ही आयातित धातुओं के डायवर्जन का आरोप साबित हुआ। परिणामस्वरूप ₹1.44 करोड़ की ड्यूटी मांग, जब्त चांदी के आभूषणों की कार्रवाई और भारती जेम्स, पी पी ज्वेलर्स, इट्स माई नेम प्राइवेट लिमिटेड तथा संबंधित व्यक्तियों पर लगाए गए सभी दंड रद्द कर दिए गए।
