फ्लैट खरीदारों को बड़ा झटका: बकाया भुगतान नहीं किया तो रद्द होगी अलॉटमेंट, महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी का सख्त आदेश

The Rajpatra Law

मुंबई में रियल एस्टेट क्षेत्र से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में महाराष्ट्र रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (MahaRERA) ने दो फ्लैट खरीदारों को बकाया राशि और ब्याज का भुगतान करने का निर्देश दिया है। प्राधिकरण ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है, तो संबंधित फ्लैटों की अलॉटमेंट रद्द कर दी जाएगी और बिल्डर को उन फ्लैटों को किसी अन्य खरीदार को बेचने की अनुमति होगी। यह फैसला रियल एस्टेट (विनियमन एवं विकास) अधिनियम, 2016 (RERA) के तहत खरीदारों और डेवलपर्स दोनों की जिम्मेदारियों को रेखांकित करता है।

मामला ट्रांसकॉन शेठ क्रिएटर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दायर दो शिकायतों से जुड़ा है। कंपनी मुंबई के बोरीवली स्थित “ऑरिस इलारिया – टॉवर ए” परियोजना की प्रमोटर है। कंपनी ने आरोप लगाया था कि दोनों खरीदारों ने फ्लैट बुक करने और एग्रीमेंट फॉर सेल निष्पादित करने के बाद शुरुआती भुगतान तो किया, लेकिन बाद की किश्तों का भुगतान नहीं किया।

पहले मामले में खरीदार ने 88 लाख रुपये मूल्य के फ्लैट के लिए केवल 8.62 लाख रुपये का भुगतान किया था। रिकॉर्ड के अनुसार, बाद में उसने आर्थिक कठिनाइयों का हवाला देते हुए कभी बुकिंग रद्द करने की मांग की, कभी भुगतान के लिए अतिरिक्त समय मांगा और फिर रद्दीकरण का अनुरोध वापस ले लिया। डेवलपर का दावा था कि फरवरी 2023 तक लगभग 39.71 लाख रुपये की राशि ब्याज सहित बकाया हो चुकी थी।

दूसरे मामले में 1.97 करोड़ रुपये मूल्य के फ्लैट के लिए खरीदारों ने लगभग 19.30 लाख रुपये का भुगतान किया था। डेवलपर के अनुसार, आगे के भुगतान के लिए जारी किए गए चार चेक बैंक में प्रस्तुत करने पर बाउंस हो गए। इसके बावजूद खरीदारों ने न तो नए चेक दिए और न ही किसी अन्य माध्यम से भुगतान किया। अप्रैल 2024 तक ब्याज सहित बकाया राशि लगभग 1.44 करोड़ रुपये पहुंच गई थी।

सुनवाई के दौरान दोनों मामलों में खरीदार उपस्थित नहीं हुए और उन्होंने कोई जवाब भी दाखिल नहीं किया। इसके चलते MahaRERA ने मामलों की सुनवाई एकतरफा (Ex-Parte) आधार पर की। प्राधिकरण ने पाया कि डेवलपर द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों और नोटिसों का किसी भी पक्ष से खंडन नहीं किया गया।

अपने आदेश में MahaRERA ने कहा कि RERA अधिनियम की धारा 19(6) के तहत प्रत्येक आवंटी (Allottee) का यह वैधानिक दायित्व है कि वह एग्रीमेंट फॉर सेल में निर्धारित समय और तरीके के अनुसार भुगतान करे। वहीं धारा 11 प्रमोटर पर परियोजना को स्वीकृत योजना और तय समयसीमा के अनुसार पूरा करने की जिम्मेदारी डालती है। प्राधिकरण ने कहा कि कानून केवल खरीदारों को अधिकार नहीं देता बल्कि उन पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की जिम्मेदारी भी डालता है।

प्राधिकरण ने यह भी पाया कि परियोजना में 75 प्रतिशत से अधिक निर्माण कार्य पूरा हो चुका है और कब्जा देने की संविदात्मक तिथि 30 अप्रैल 2027 है। रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य नहीं था जिससे यह साबित हो कि परियोजना में किसी प्रकार की देरी डेवलपर की ओर से हुई हो। इसलिए भुगतान में चूक के लिए खरीदार ही जिम्मेदार पाए गए।

MahaRERA ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि “किसी प्रमोटर को अनिश्चित काल तक ऐसे फ्लैट ब्लॉक करके रखने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता, जहां आवंटी लगातार भुगतान दायित्वों का उल्लंघन करता रहे।” प्राधिकरण ने माना कि लगातार भुगतान न मिलने से परियोजना की नकदी प्रवाह व्यवस्था, वित्तीय योजना और अन्य हितधारकों के हित प्रभावित होते हैं।

आदेश के तहत पहले मामले में खरीदार को 37.57 लाख रुपये तथा दूसरे मामले में खरीदारों को संयुक्त रूप से 1.25 करोड़ रुपये का बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया गया है। इन राशियों पर भारतीय स्टेट बैंक की उच्चतम एमसीएलआर (MCLR) दर के साथ 2 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज भी देना होगा। यह ब्याज महाराष्ट्र RERA नियम, 2017 के नियम 18 के अनुसार निर्धारित किया गया है।

MahaRERA ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि 30 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो प्रमोटर RERA अधिनियम की धारा 11(5) के तहत फ्लैटों की अलॉटमेंट रद्द कर सकता है। रद्दीकरण के बाद डेवलपर को समझौते की शर्तों और लागू कानून के अनुसार निर्धारित राशि जब्त करने का अधिकार होगा तथा शेष राशि, यदि कोई बचती है, तो खरीदारों को वापस करनी होगी।

इसके अलावा, यदि खरीदार रद्दीकरण विलेख (Cancellation Deed) के निष्पादन में सहयोग नहीं करते हैं, तो प्रमोटर MahaRERA सर्कुलर 50/2025 का सहारा ले सकता है। इस सर्कुलर के तहत प्राधिकरण किसी अधिकृत अधिकारी को नियुक्त कर सकता है जो डिफॉल्टर आवंटी की ओर से रद्दीकरण दस्तावेज निष्पादित और पंजीकृत करेगा।

यह फैसला रियल एस्टेट क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इससे स्पष्ट संदेश जाता है कि RERA केवल खरीदारों की सुरक्षा के लिए नहीं है, बल्कि यह खरीदारों और डेवलपर्स दोनों के अधिकारों और दायित्वों के बीच संतुलन बनाए रखने का कानून है। लगातार भुगतान में चूक करने वाले खरीदारों को अब अलॉटमेंट रद्द होने और संपत्ति पर अपने अधिकार खोने का जोखिम उठाना पड़ सकता है।