बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने चुनाव के दौरान लगाए गए जनरेटर के किराये से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि यदि जनरेटर को निर्धारित स्थान पर स्थापित कर उपयोग के लिए तैयार रखा गया था, तो केवल उसके चालू नहीं होने के आधार पर किराया रोका नहीं जा सकता।
FAM No. 11/2023, Election Commission of India बनाम District Election Officer, Kondagaon में जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने करीब 69.69 लाख रुपये के भुगतान संबंधी Commercial Court के आदेश को बरकरार रखा। कोर्ट ने कहा कि जनरेटर की contractual deployment और ready-to-use स्थिति किराये के भुगतान के लिए पर्याप्त थी।
कोर्ट ने यह भी माना कि सप्लायर का दावा limitation से बाहर नहीं था, क्योंकि संबंधित विभाग ने 31 मार्च 2016 को अंतिम निर्णय लिया था और उसके तीन साल के भीतर 27 मार्च 2019 को वसूली का मुकदमा दायर किया गया था। इसके बाद हाईकोर्ट ने Election Commission की अपील खारिज कर दी।
