नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने केरल हाई कोर्ट के उन आदेशों को रद्द कर दिया है, जिनमें भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) को कुछ Hindi Translators की पदोन्नति पुराने भर्ती नियमों के तहत विचार करने का निर्देश दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल officiating basis पर काम करने वाले कर्मचारियों को समाप्त हो चुके पुराने भर्ती नियमों के तहत पदोन्नति का कोई निहित या vested right प्राप्त नहीं होता।
जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने BSNL की ओर से दायर अपीलों पर फैसला सुनाते हुए केरल हाई कोर्ट के संबंधित आदेशों को निरस्त कर दिया।
मामला उन कर्मचारियों से जुड़ा था, जिन्हें Hindi Translators के विभिन्न ग्रेड में नियुक्त किया गया था और जो बाद में Assistant Director (Official Language) के पद पर officiating capacity में कार्य कर रहे थे। इस पद का बाद में नाम बदलकर Rajbhasha Adhikari कर दिया गया।
कर्मचारियों का दावा था कि उन्हें 1994 के एक प्रशासनिक परिपत्र के आधार पर Hindi Officer के पद पर स्वतः पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए था। इसके बाद 2002 के Assistant Director (Official Language) Recruitment Rules के तहत भी Hindi Translators से मौजूदा 120 रिक्तियों को भरने का प्रावधान किया गया था। हालांकि, 2002 के नियम प्रभावी ही नहीं किए गए और प्रस्तावित पदोन्नति का लाभ भी कर्मचारियों को नहीं मिला।
बाद में वर्ष 2005 में नए Rajbhasha Adhikari Recruitment Rules लागू किए गए। इन नियमों के तहत पदोन्नति के लिए लिखित परीक्षा उत्तीर्ण करना आवश्यक किया गया। पात्र उम्मीदवारों की कमी होने पर शेष पदों को direct recruitment से भरने का प्रावधान भी किया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने Mishri Lal मामले को माना लागू
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष मुख्य सवाल यह था कि क्या कर्मचारियों का मामला CMD/Chairman, BSNL v. Mishri Lal के फैसले के तहत आएगा या Medini C. v. BSNL के तीन न्यायाधीशों की पीठ के फैसले के तहत।
कोर्ट ने पाया कि मौजूदा मामले में कर्मचारी Rajbhasha Adhikari के पद पर कभी नियमित या ad hoc आधार पर पदोन्नत नहीं हुए थे। वे केवल officiating capacity में कार्यरत थे।
यही तथ्य इस मामले को Mishri Lal के अनुरूप बनाता है। वहीं Medini C. मामले में कर्मचारियों को 2002 के नियमों के तहत provisional promotion दी गई थी और बाद में उनकी सेवाएं नियमित भी की गई थीं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मौजूदा मामले में यह महत्वपूर्ण परिस्थिति पूरी तरह अनुपस्थित थी।
पुराने नियमों के तहत पदोन्नति का vested right नहीं
पीठ ने State of Himachal Pradesh v. Raj Kumar के फैसले पर भी भरोसा किया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने पुराने Y.V. Rangaiah v. J. Sreenivasa Rao के सिद्धांत को पलट दिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि कर्मचारी को पदोन्नति के लिए विचार किए जाने का अधिकार उस समय लागू नियमों के अनुसार होता है, जब eligible candidates पर विचार किया जाता है। कोर्ट ने कहा कि:
“A candidate has a right to be considered in the light of the existing rules…”
अर्थात किसी कर्मचारी का यह दावा नहीं हो सकता कि रिक्तियां पुराने नियमों के दौरान उत्पन्न हुई थीं, इसलिए उसका मामला अनिवार्य रूप से उन्हीं पुराने नियमों के तहत तय किया जाए।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार Article 14 के अनुरूप निष्पक्ष और उचित नीति के तहत यह निर्णय ले सकती है कि पुराने और repealed rules के आधार पर रिक्तियों को नहीं भरा जाए। केवल रिक्ति के पुराने नियमों के दौरान मौजूद होने से कर्मचारी को पदोन्नति का vested right प्राप्त नहीं हो जाता।
केरल हाई कोर्ट के आदेश रद्द
इन परिस्थितियों में सुप्रीम कोर्ट ने माना कि केरल हाई कोर्ट को respondents की पदोन्नति पर 2005 के नियमों के बजाय पुराने नियमों के आधार पर विचार करने का निर्देश नहीं देना चाहिए था।
पीठ ने BSNL की अपीलों को स्वीकार करते हुए केरल हाई कोर्ट के संबंधित common judgments को set aside कर दिया। लंबित applications का भी निस्तारण कर दिया गया।
