छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए कहा है कि राजस्व अधिकारी या कलेक्टर किसी रजिस्टर्ड बिक्री विलेख (Sale Deed) को शून्य (Null and Void) घोषित नहीं कर सकते। न्यायमूर्ति अमितेन्द्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने स्पष्ट किया कि ऐसा अधिकार केवल सक्षम सिविल कोर्ट को है।
मामला गरियाबंद जिले की उस भूमि से जुड़ा था, जो मूल रूप से सरकारी पट्टे पर दी गई थी। कलेक्टर ने छत्तीसगढ़ भूमि राजस्व संहिता, 1959 की धारा 158(3) और 165(7-b) के उल्लंघन का हवाला देते हुए बिक्री विलेख को निरस्त कर भूमि को राज्य सरकार के नाम दर्ज करने का आदेश दिया था।
हाईकोर्ट ने माना कि सरकारी पट्टे की भूमि के हस्तांतरण के लिए कलेक्टर की पूर्व अनुमति आवश्यक हो सकती है, लेकिन रजिस्टर्ड बिक्री विलेख को अमान्य घोषित करने का अधिकार राजस्व न्यायालय के पास नहीं है। न्यायालय ने कहा कि इस प्रकार का विवाद विशिष्ट राहत अधिनियम, 1963 के तहत केवल सिविल कोर्ट ही तय कर सकता है।
अदालत ने कलेक्टर के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें बिक्री विलेख को शून्य घोषित किया गया था। हालांकि, राज्य सरकार को कानून के अनुसार सक्षम सिविल कोर्ट में उचित कार्रवाई करने की स्वतंत्रता दी गई है।
