सुप्रीम कोर्ट ने लालू प्रसाद यादव को मिली सजा निलंबन राहत बरकरार रखी, झारखंड हाईकोर्ट से छह माह में अपील निपटाने का आग्रह

Supreme Court of India

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चारा घोटाले के देवघर कोषागार मामले में राष्ट्रीय जनता दल (राजद) प्रमुख लालू प्रसाद यादव को झारखंड हाईकोर्ट द्वारा दी गई सजा निलंबन की राहत में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट से लंबित आपराधिक अपील का छह माह के भीतर अंतिम निस्तारण करने का अनुरोध किया है।

न्यायमूर्ति एम.एम. सुन्दरेश और न्यायमूर्ति पी.बी. वराले की पीठ ने झारखंड सरकार द्वारा दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को खारिज कर दिया। राज्य सरकार ने 12 जुलाई 2019 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसके तहत झारखंड हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद यादव की सजा निलंबित कर दी थी।

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अपील वर्ष 2018 से लंबित है और लगभग सात वर्ष बीत चुके हैं। ऐसे में इस चरण पर हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करना उचित नहीं होगा। पीठ ने कहा कि मामले की लंबी लंबित स्थिति को देखते हुए अपील की अंतिम सुनवाई शीघ्र पूरी की जानी चाहिए।

झारखंड सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने दलील दी कि हाईकोर्ट ने यह मानकर सजा निलंबित की कि लालू प्रसाद यादव अपनी सजा की आधी अवधि पूरी कर चुके हैं, जबकि यह निष्कर्ष विधिसम्मत नहीं था। उन्होंने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 427 का हवाला देते हुए कहा कि चारा घोटाले के अलग-अलग मामलों में सुनाई गई सजाओं को स्वतः समवर्ती (Concurrent) नहीं माना जा सकता। इसलिए कारावास की अवधि की गणना हाईकोर्ट ने गलत आधार पर की।

वहीं लालू प्रसाद यादव की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने राज्य सरकार की दलीलों का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सजाएं साथ-साथ चलेंगी या क्रमवार, यह प्रश्न अंतिम सुनवाई के समय तय किया जाएगा, न कि सजा निलंबन पर विचार करते समय। उन्होंने यह भी कहा कि हाईकोर्ट ने पहले भी ऐसे अन्य दोषियों को राहत दी है जिन्होंने अपनी सजा की आधी अवधि पूरी कर ली थी।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अपील लंबे समय से लंबित है और इस कारण हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने का कोई औचित्य नहीं है। हालांकि, अदालत ने झारखंड हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि वह लंबित आपराधिक अपील का छह माह के भीतर अंतिम निर्णय करे।

उल्लेखनीय है कि देवघर कोषागार चारा घोटाला मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने लालू प्रसाद यादव को दोषी ठहराते हुए साढ़े तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई थी। वर्ष 2019 में झारखंड हाईकोर्ट ने यह पाते हुए कि उन्होंने सजा की आधे से अधिक अवधि पूरी कर ली है तथा समान परिस्थितियों वाले अन्य सह-दोषियों को भी ऐसी राहत मिल चुकी है, उनकी सजा निलंबित कर दी थी।