छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने मोटर दुर्घटना दावा अधिकरण (एमएसीटी) द्वारा मृतक शासकीय कर्मचारी के परिजनों को दिए गए ₹46.04 लाख के मुआवजे को बरकरार रखते हुए बीमा कंपनी की अपील खारिज कर दी है। न्यायमूर्ति संजय कुमार जायसवाल ने कहा कि मोटर दुर्घटना मुआवजा मामलों में दावेदारों को अपना मामला “संभावनाओं के आधार” (Preponderance of Probabilities) पर सिद्ध करना होता है, न कि आपराधिक मामलों की तरह संदेह से परे प्रमाणित करना।
बीमा कंपनी का तर्क था कि दुर्घटना के लगभग तीन माह बाद स्कॉर्पियो वाहन को जब्त कर उसे मामले में गलत तरीके से शामिल किया गया। हालांकि, हाई कोर्ट ने पाया कि पुलिस जांच, प्रत्यक्षदर्शी गवाह के बयान और चालक के विरुद्ध दाखिल आरोपपत्र से वाहन की संलिप्तता सिद्ध होती है। अदालत ने कहा कि बीमा कंपनी ऐसा कोई स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सकी जिससे पुलिस जांच या दावेदारों के साक्ष्यों का खंडन हो सके। इसके साथ ही न्यायालय ने एमएसीटी का 13 अप्रैल 2023 का मुआवजा आदेश यथावत रखते हुए अपील खारिज कर दी।
