छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि मृत सरकारी कर्मचारी के परिवार का कोई सदस्य पहले से सरकारी सेवा में कार्यरत है, तो अन्य आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का लाभ नहीं दिया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि संबंधित परिवार सदस्य के अलग रहने या मृत कर्मचारी पर आर्थिक रूप से निर्भर न होने से इस नियम में कोई छूट नहीं मिलती।
मामला धमतरी जिले के हेनरी रंगारी से जुड़ा था, जिन्होंने अपने पिता अशोक कुमार रंगारी की सेवा के दौरान मृत्यु के बाद अनुकंपा नियुक्ति की मांग की थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि उनका बड़ा सौतेला भाई कई वर्षों से अलग रह रहा है, उसका अपना परिवार है और वह मृत कर्मचारी पर निर्भर नहीं था। इसके बावजूद प्रशासन ने यह कहते हुए आवेदन खारिज कर दिया कि भाई पहले से सरकारी नौकरी में है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रविन्द्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने राज्य सरकार के निर्णय को सही ठहराया। अदालत ने कहा कि छत्तीसगढ़ अनुकंपा नियुक्ति नीति, 2013 की धारा 6(ए) के अनुसार परिवार का कोई सदस्य सरकारी सेवा में होने पर अन्य सदस्य अनुकंपा नियुक्ति के पात्र नहीं रहते।
हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अनुकंपा नियुक्ति कोई मौलिक अधिकार नहीं है, बल्कि सामान्य भर्ती प्रक्रिया का अपवाद है और इसे केवल नीति में निर्धारित शर्तों के अनुसार ही दिया जा सकता है। इसी आधार पर अदालत ने याचिकाकर्ता की अपील खारिज करते हुए पूर्व में पारित आदेशों को बरकरार रखा।
