सुप्रीम कोर्ट ने BCI के पुनर्गठन का मुद्दा टाला, राज्य बार काउंसिलों को वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के निर्देश

Supreme Court of India

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि वह बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के पुनर्गठन के मुद्दे पर तभी विचार करेगा, जब नवनिर्वाचित राज्य बार काउंसिलें BCI के गठन से जुड़ी वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर लेंगी।

मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी, जिनमें वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा के BCI अध्यक्ष पद पर लगातार बने रहने और उनके कार्यकाल को कथित रूप से वर्ष 2030 तक बढ़ाए जाने को चुनौती दी गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मनन कुमार मिश्रा के अध्यक्ष पद पर बने रहने तथा BCI के पुनर्गठन की आवश्यकता से जुड़े सवालों पर विचार सभी राज्य बार काउंसिलों के चुनाव पूरे होने और उनके प्रतिनिधियों के BCI के लिए चुने जाने के बाद किया जाएगा।

राज्य बार काउंसिलों के गठन को लेकर समयसीमा तय

पीठ ने संबंधित क्षेत्राधिकार वाले हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों को निर्देश दिया कि राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लंबित सह-नामांकन की प्रक्रिया दो सप्ताह के भीतर पूरी कराई जाए।

इसके बाद संबंधित राज्य बार काउंसिलों को अपनी अंतिम संरचना एक सप्ताह के भीतर अधिसूचित करनी होगी।

अंतिम संरचना अधिसूचित होने के बाद काउंसिलों को अगले दो सप्ताह के भीतर अधिवक्ता अधिनियम की धारा 4(1)(c) के तहत शेष वैधानिक प्रक्रिया पूरी करनी होगी और इसकी अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।

BCI का मौजूदा ढांचा दैनिक कार्यों के लिए जारी रहेगा

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि निर्वाचित BCI के गठन तक मौजूदा व्यवस्था को उसके दैनिक कामकाज के लिए जारी रखा जा सकता है।

हालांकि, नीतिगत निर्णयों के संबंध में कोर्ट ने निगरानी की व्यवस्था लागू की है। अदालत ने निर्देश दिया कि इस अंतरिम अवधि में BCI द्वारा लिए जाने वाले प्रत्येक नीतिगत निर्णय में भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को सक्रिय रूप से शामिल किया जाए।

इस व्यवस्था का उद्देश्य BCI के नियमित कामकाज को प्रभावित किए बिना उसके निर्वाचित निकाय के गठन की वैधानिक प्रक्रिया पूरी कराना है।

मनन कुमार मिश्रा के कार्यकाल का मुद्दा अभी खुला

याचिकाओं में वरिष्ठ अधिवक्ता मनन कुमार मिश्रा के BCI अध्यक्ष पद पर बने रहने और उनके कार्यकाल को कथित रूप से वर्ष 2030 तक बढ़ाए जाने पर सवाल उठाए गए हैं।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इस विवाद पर अंतिम निर्णय नहीं दिया है। अदालत ने इस मुद्दे को राज्य बार काउंसिलों के चुनाव और उनके प्रतिनिधियों के माध्यम से BCI के गठन की प्रक्रिया पूरी होने से जोड़ दिया है।

इस प्रकार, अदालत ने पहले राज्य बार काउंसिलों की वैधानिक प्रक्रिया पूरी कराने को प्राथमिकता दी है। इसके बाद ही BCI के वर्तमान नेतृत्व और उसके पुनर्गठन से संबंधित सवालों पर विस्तृत विचार किया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्देश

  • राज्य बार काउंसिलों में महिलाओं के लंबित सह-नामांकन की प्रक्रिया दो सप्ताह में पूरी की जाए।
  • इसके बाद राज्य बार काउंसिलों की अंतिम संरचना एक सप्ताह में अधिसूचित की जाए।
  • धारा 4(1)(c), अधिवक्ता अधिनियम के तहत शेष वैधानिक प्रक्रिया अगले दो सप्ताह में पूरी की जाए।
  • संबंधित काउंसिलों को अनुपालन रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत करनी होगी।
  • निर्वाचित BCI के गठन तक मौजूदा व्यवस्था को दैनिक कामकाज के लिए जारी रखा जाएगा।
  • प्रत्येक नीतिगत निर्णय में भारत के अटॉर्नी जनरल और सॉलिसिटर जनरल को सक्रिय रूप से शामिल किया जाएगा।
  • BCI अध्यक्ष के कार्यकाल और BCI के पुनर्गठन के मुद्दे पर राज्य बार काउंसिलों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद विचार किया जाएगा।