क्षेत्रीय भाषाओं को कानूनी शिक्षा से जोड़ने पर राष्ट्रीय सम्मेलन, 10 वर्षीय कार्ययोजना तैयार करने पर मंथन

Centres of Legal Education Ministry of Law & Justice GoI

विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग ने भारतीय विधिज्ञ परिषद (बीसीआई) के सहयोग से नई दिल्ली में “क्षेत्रीय भाषाओं के एकीकरण के माध्यम से कानूनी शिक्षा को सुदृढ़ बनाने” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया। सम्मेलन का उद्देश्य हिंदी तथा अन्य भारतीय भाषाओं में कानूनी शिक्षा को बढ़ावा देने और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए दस वर्षीय दृष्टि आधारित कार्ययोजना तैयार करना था।

सम्मेलन में नीति निर्माताओं, विधि विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और अन्य संबंधित पक्षों ने भाग लिया। इस दौरान कानूनी शिक्षा में भारतीय भाषाओं के चरणबद्ध, व्यवस्थित, मापनीय और गुणवत्ता आधारित समावेशन के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार करने पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया। साथ ही इस बात पर भी बल दिया गया कि अंग्रेजी को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संपर्क भाषा के रूप में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका के साथ बनाए रखा जाए।

प्रतिभागियों ने द्विभाषी तथा क्रमिक रूप से बहुभाषी कानूनी शिक्षा मॉडल को अपनाने पर जोर दिया। उनका मानना था कि इससे विधि छात्रों की कानूनी विषयों पर समझ बेहतर होगी, न्याय तक आम लोगों की पहुंच आसान बनेगी, विधिक सहायता और क्लिनिकल विधि शिक्षा को मजबूती मिलेगी तथा भावी विधि पेशेवर जिला और अधीनस्थ न्यायालयों में अधिक प्रभावी ढंग से कार्य करने के लिए तैयार हो सकेंगे।

सम्मेलन में कानूनी व्यवस्था में भाषाई समावेशन को गति देने में प्रौद्योगिकी की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने डिजिटल उपकरणों, अनुवाद तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता के माध्यम से विभिन्न भारतीय भाषाओं में कानूनी सामग्री उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर विचार व्यक्त किए। उनका कहना था कि इससे कानूनी शिक्षा अधिक समावेशी बनेगी और आम नागरिकों की न्याय तक पहुंच भी आसान होगी।

सम्मेलन में हुई चर्चाओं से तैयार होने वाली कार्ययोजना के माध्यम से भारत में कानूनी शिक्षा को अधिक समावेशी, व्यावहारिक और प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जाने की उम्मीद जताई गई।