शहरी कृषि भूमि की बिक्री पर धारा 54B का लाभ मिलेगा, आयकर अपीलीय अधिकरण ने करदाता को दी बड़ी राहत

Income Tax Appellate Tribunal - ITAT

आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि यदि भूमि वास्तव में कृषि कार्यों के लिए उपयोग की गई हो और बिक्री से प्राप्त राशि को नई कृषि भूमि खरीदने में लगाया गया हो, तो केवल इस आधार पर धारा 54B का लाभ नहीं छीना जा सकता कि भूमि नगरपालिका क्षेत्र के निकट स्थित थी। अधिकरण ने अहमदाबाद के करदाता अश्विनकुमार जोताराम पटेल के पक्ष में फैसला सुनाते हुए लगभग 1.45 करोड़ रुपये की कर छूट बहाल कर दी।

मामला आकलन वर्ष 2016-17 से संबंधित था। करदाता ने नगरपालिका सीमा से आठ किलोमीटर के भीतर स्थित कृषि भूमि को बेचने के बाद आयकर अधिनियम की धारा 54B के तहत पूंजीगत लाभ पर छूट का दावा किया था। यह प्रावधान उन करदाताओं को राहत देता है जो कृषि भूमि बेचकर निर्धारित अवधि के भीतर दूसरी कृषि भूमि खरीदते हैं। हालांकि, आकलन अधिकारी ने यह कहते हुए दावा अस्वीकार कर दिया कि संबंधित भूमि धारा 54B के लाभ के लिए पात्र नहीं है। बाद में आयकर आयुक्त (अपील) ने भी इस निर्णय को बरकरार रखा।

अपील की सुनवाई के दौरान करदाता ने बताया कि भूमि पर वास्तविक कृषि गतिविधियां संचालित की जा रही थीं और इसे साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध हैं। रिकॉर्ड में मौजूद रिमांड रिपोर्ट में भी यह स्वीकार किया गया था कि भूमि पर खेती की जा रही थी। रिपोर्ट के अनुसार, करदाता ने एक कृषक का शपथपत्र प्रस्तुत किया था, जिसमें बताया गया था कि वह भूमि पर खेती करता था और उपज का एक हिस्सा भूमि स्वामी को देता था। इसके अलावा बीज, उर्वरक, कीटनाशक और यूरिया की खरीद से संबंधित बिल भी प्रस्तुत किए गए थे।

रिमांड जांच के बाद स्वयं आकलन अधिकारी ने यह निष्कर्ष दर्ज किया था कि भूमि पर हस्तांतरण से ठीक पहले कृषि गतिविधियां संचालित हो रही थीं। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि भूमि की बिक्री के बाद करदाता ने लगभग 1.59 करोड़ रुपये की नई कृषि भूमि खरीदी थी, जिसके आधार पर 1.45 करोड़ रुपये की धारा 54B छूट का दावा किया गया था।

अधिकरण ने कहा कि जब आकलन अधिकारी ने अतिरिक्त साक्ष्यों की जांच कर स्पष्ट रूप से यह स्वीकार कर लिया कि भूमि कृषि प्रयोजनों के लिए उपयोग की गई थी और धारा 54B की सभी शर्तें पूरी होती हैं, तब अपीलीय प्राधिकारी बिना किसी विपरीत साक्ष्य के उन निष्कर्षों को नजरअंदाज नहीं कर सकता। न्यायाधिकरण ने टिप्पणी की कि “रिमांड रिपोर्ट में दर्ज निष्कर्ष करदाता के दावे का स्पष्ट समर्थन करते हैं और रिकॉर्ड पर ऐसा कोई साक्ष्य उपलब्ध नहीं है जिससे उन्हें अविश्वसनीय माना जा सके।”

पीठ ने यह भी नोट किया कि मामला सीमित जांच (Limited Scrutiny) के लिए चुना गया था और धारा 54B की छूट का मुद्दा मूल जांच के दायरे में नहीं था। हालांकि, चूंकि करदाता को मेरिट के आधार पर राहत दी जा रही थी, इसलिए अधिकरण ने इस कानूनी विवाद पर अलग से निर्णय देना आवश्यक नहीं समझा।

फैसले का महत्व इस बात में है कि यह धारा 54B की व्याख्या को अधिक व्यावहारिक और तथ्य आधारित बनाता है। अधिकरण ने संकेत दिया कि छूट का निर्धारण भूमि के वास्तविक उपयोग और पुनर्निवेश की शर्तों पर होना चाहिए, न कि केवल उसके भौगोलिक स्थान के आधार पर। इससे उन किसानों और भूमि स्वामियों को राहत मिल सकती है जिनकी कृषि भूमि शहरी विस्तार के कारण नगरपालिका सीमाओं के निकट आ गई है।

सभी तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद ITAT ने आकलन अधिकारी और आयुक्त (अपील) द्वारा की गई छूट की अस्वीकृति को रद्द कर दिया तथा करदाता को धारा 54B के तहत 1,45,73,828 रुपये की छूट का लाभ देने का निर्देश दिया। अपील को पूर्ण रूप से स्वीकार कर लिया गया।