मध्यस्थता भी अदालतों जैसी हो रही, इसे सभी के लिए सुलभ बनाना होगा: सीजेआई सूर्यकांत

CJI Surya Kant

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) Surya Kant ने कहा है कि मध्यस्थता (Arbitration) व्यवस्था धीरे-धीरे पारंपरिक अदालतों जैसी होती जा रही है, जबकि इसका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया का तेज और प्रभावी विकल्प उपलब्ध कराना था। लंदन में आयोजित इंडो-यूके वाणिज्यिक विवादों पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि बढ़ती लागत, प्रक्रियागत देरी और जटिलताओं के कारण मध्यस्थता अपनी मूल भावना से दूर होती जा रही है।

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि उच्च मूल्य वाले अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता मामलों में नियुक्तियां अक्सर सीमित संख्या में मध्यस्थों और कानूनी विशेषज्ञों तक सिमट जाती हैं, जिससे नई प्रतिभाओं के लिए अवसर कम हो जाते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब मध्यस्थता में भी लंबी सुनवाई, विस्तृत दलीलें और भारी कानूनी खर्च देखने को मिल रहे हैं, जो इसकी दक्षता को प्रभावित करते हैं।

उन्होंने हाल ही में हुए India–United Kingdom Free Trade Agreement का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यापार और निवेश को बढ़ावा देने के लिए एक मजबूत एवं प्रभावी विवाद निपटान प्रणाली आवश्यक है। सीजेआई ने जोर देकर कहा कि मध्यस्थता केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि एमएसएमई, स्टार्टअप और उभरते व्यवसायों के लिए भी सुलभ और किफायती होनी चाहिए।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि मध्यस्थता को दक्षता, निष्पक्षता और सुलभता जैसे अपने मूल उद्देश्यों की ओर लौटना होगा, ताकि यह न्याय का प्रभावी साधन बनी रहे, न कि केवल आर्थिक रूप से सक्षम पक्षों के लिए उपलब्ध एक विशेष व्यवस्था।