नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा है कि भारत को प्रमुख अंतरराष्ट्रीय आर्बिट्रेशन (मध्यस्थता) सीट बनाने के लिए पारदर्शिता, पेशेवर जवाबदेही और प्रक्रिया में तेजी जरूरी है। वह नई दिल्ली में आयोजित इंडिया ADR वीक 2026 के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आर्बिट्रेशन चुनने वाले पक्षकारों को केवल जीत की उम्मीद नहीं होती, बल्कि वे मामलों के निपटारे की अवधि, निर्णयकर्ता और प्रक्रिया के मानकों को लेकर निश्चितता चाहते हैं। उन्होंने आर्बिट्रेटरों के हितों के टकराव, मामलों की संख्या, अवॉर्ड देने में लगने वाले औसत समय और विशेषज्ञता से जुड़ी जानकारी वाला साझा डिस्क्लोजर रजिस्टर बनाने का सुझाव दिया।
उन्होंने कहा कि कानून न्यूनतम मानक तय कर सकता है, लेकिन उच्च मानक स्थापित करने में पेशेवर स्व-नियमन की अहम भूमिका होगी। CJI ने कहा, “सीट केवल कागज पर नहीं चुनी जाती, उसका चुनाव अनुभव के आधार पर होता है।”
उन्होंने ऊर्जा और टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़े बढ़ते विवादों के मद्देनजर विशेषज्ञ आर्बिट्रेशन पैनल और मजबूत संस्थागत व्यवस्था की जरूरत पर भी जोर दिया।
