बिलासपुर: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न की शिकायत से जुड़ी जांच को रद्द करते हुए नए सिरे से जांच कराने का आदेश दिया है। कोर्ट ने पाया कि शिकायत की जांच के लिए गठित आंतरिक शिकायत समिति (Internal Complaints Committee-ICC) का गठन कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न अधिनियम, 2013 (PoSH Act) की धारा 4 के अनुसार नहीं किया गया था।
मामला जागेश्वरी ठाकुर बनाम छत्तीसगढ़ राज्य एवं अन्य, WPC No. 2224/2022 का है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया था कि कार्यालय में उनके साथ अनुचित व्यवहार और कार्यस्थल पर उत्पीड़न किया गया। शिकायत के बाद गठित ICC में ऐसे अधिकारी शामिल थे जो कथित आरोपी अधिकारी से कनिष्ठ थे। याचिकाकर्ता ने समिति की निष्पक्षता पर आपत्ति जताते हुए वरिष्ठ सदस्यों वाली नई समिति गठित करने की मांग की थी।
हाईकोर्ट ने कहा कि PoSH Act की धारा 4 के तहत ICC का गठन निर्धारित तरीके से होना अनिवार्य है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि “If the primary constitution of a Committee is defective, any inquiry conducted by it is devoid of jurisdiction”, यानी समिति का मूल गठन ही कानून के अनुरूप नहीं है तो उसके द्वारा की गई जांच वैध नहीं मानी जा सकती।
कोर्ट ने पहले की पूरी जांच और रिपोर्ट को निरस्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को धारा 4(2) के अनुरूप नई Internal Complaints Committee गठित कर मामले की दोबारा जांच करने का निर्देश दिया।
