छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट, बिलासपुर ने चेक बाउंस मामले में दोषसिद्ध महिला को मुआवजे की 20% राशि जमा करने के निर्देश वाले आदेश को निरस्त कर दिया है। जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू की एकलपीठ ने कहा कि परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 की धारा 148 के तहत अपीलीय अदालत को जमा राशि में छूट देने या उसे कम करने का विवेकाधिकार है, लेकिन इसके लिए उचित कारण दर्ज करना आवश्यक है।
मामले में मजिस्ट्रेट ने परमेश्वरी सोनी को धारा 138 के तहत दोषी ठहराते हुए एक महीने के साधारण कारावास और ₹10,16,381 मुआवजा देने की सजा सुनाई थी। अपील के दौरान महिला ने आर्थिक तंगी और मामूली पेंशन पर निर्भर होने का हवाला देते हुए 20% राशि जमा करने से छूट मांगी थी। हाईकोर्ट ने पाया कि अपीलीय अदालत ने छूट देने से इनकार करने के कारण स्पष्ट नहीं किए थे।
हाईकोर्ट ने जमा राशि संबंधी आदेश निरस्त करते हुए मामले को दोबारा विचार के लिए अपीलीय अदालत भेज दिया और एक महीने के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया। हालांकि, हाईकोर्ट ने दोषसिद्धि को निरस्त नहीं किया और न ही जमा राशि से स्थायी छूट दी।
