90 वर्षीय संत ने बेची पैतृक संपत्ति, 50 लाख से बनवाया अस्पताल; पांच साल बाद भी दुबचेरा के ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित

बालोद जिले के दुबचेरा गांव में ग्रामीणों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 90 वर्षीय संत गुरु सुखदास द्वारा किया गया एक अनूठा प्रयास आज भी अधूरा सपना बना हुआ है। संत गुरु सुखदास ने अपनी पैतृक संपत्ति बेचकर करीब 50 लाख रुपये की लागत से गांव में अस्पताल भवन का निर्माण कराया था, लेकिन निर्माण कार्य पूरा होने के लगभग पांच वर्ष बाद भी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं शुरू नहीं हो सकी हैं।

ग्रामीणों के अनुसार संत गुरु सुखदास ने क्षेत्र के लोगों को उपचार के लिए दूर-दराज के अस्पतालों पर निर्भर रहने की समस्या को देखते हुए यह पहल की थी। उन्होंने अपनी निजी संपत्ति का त्याग कर अस्पताल भवन का निर्माण करवाया ताकि गांव और आसपास के लोगों को समय पर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें। भवन का निर्माण वर्षों पहले पूरा हो चुका है, लेकिन आवश्यक स्टाफ, उपकरण और प्रशासनिक स्वीकृतियों के अभाव में अस्पताल आज तक संचालित नहीं हो पाया है।

अस्पताल भवन के बंद पड़े रहने से ग्रामीणों में निराशा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य केंद्र शुरू होने से क्षेत्र के हजारों लोगों को लाभ मिल सकता था, लेकिन अब यह भवन केवल एक संरचना बनकर रह गया है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को आज भी दूसरे शहरों या सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का रुख करना पड़ता है।

ग्रामीणों ने प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से मांग की है कि अस्पताल को जल्द से जल्द शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। उनका कहना है कि संत गुरु सुखदास का त्याग और जनसेवा का उद्देश्य तभी सार्थक होगा जब इस भवन में नियमित स्वास्थ्य सेवाएं शुरू होकर लोगों को उसका वास्तविक लाभ मिल सके।