कोंडागांव में अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी, मॉनिटरिंग सेल और हिट एंड रन मामलों की समीक्षा बैठक आयोजित

The Rajpatra Law

कोंडागांव में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री खिलावन राम रिगरी की अध्यक्षता में मध्यस्थता कक्ष में अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी, मॉनिटरिंग सेल एवं हिट एंड रन मामलों की संयुक्त समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश विक्रम प्रताप चंद्रा, कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना, पुलिस अधीक्षक पंकज चंद्रा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रेशमा बैरागी पटेल, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव गायत्री साय सहित न्यायिक, प्रशासनिक और पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

अंडर ट्रायल रिव्यू कमेटी की बैठक में लंबे समय से विचाराधीन बंदियों के मामलों की विस्तृत समीक्षा की गई। विशेष रूप से उन बंदियों के प्रकरणों पर चर्चा हुई जिनकी जमानत स्वीकृत हो चुकी है, लेकिन वे जमानत की शर्तें पूरी नहीं कर पा रहे हैं, अथवा जिन्होंने संभावित अधिकतम सजा की अवधि के अनुपात में पर्याप्त समय जेल में व्यतीत कर लिया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने संबंधित अधिकारियों को पात्र बंदियों के मामलों में शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने और विधि के अनुरूप राहत प्रदान करने के निर्देश दिए। बैठक में बंदियों के अधिकारों की सुरक्षा और न्याय तक उनकी सुगम पहुंच सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही शंकर महतो प्रकरण तथा 21, 22 और 23 अगस्त को आयोजित होने वाली विशेष लोक अदालत के संबंध में भी चर्चा की गई।

मॉनिटरिंग सेल की बैठक में नवीन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय भवन के निर्माण कार्य को शीघ्र प्रारंभ कराने के लिए आवश्यक प्रक्रियाओं में तेजी लाने पर विचार किया गया। न्यायाधीश ने कलेक्टर को आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। इसके अलावा न्यायिक अधिकारियों एवं न्यायिक कर्मचारियों के निर्माणाधीन आवासों की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में पीड़िताओं, उनके परिजनों और बच्चों के लिए वातानुकूलित, सुसज्जित एवं बाल-अनुकूल कक्ष तथा शौचालय की व्यवस्था विकसित करने के विषय पर भी चर्चा हुई।

हिट एंड रन मामलों की समीक्षा के दौरान अज्ञात वाहनों से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में मृतकों और घायलों को समयबद्ध मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया पर विस्तार से विचार किया गया। पुलिस एवं परिवहन विभाग को दुर्घटना संबंधी आवश्यक दस्तावेज तैयार कर एसडीएम के समक्ष प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए, ताकि पीड़ित पक्षकारों के मुआवजा दावों का शीघ्र निपटारा हो सके। बैठक में जनजागरूकता बढ़ाने के लिए शिविरों के आयोजन और व्यापक प्रचार-प्रसार हेतु प्रशासनिक समन्वय को मजबूत करने पर भी सहमति बनी।