अहमदाबाद आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) ने रासायनिक उत्पाद बनाने वाली कंपनी गुलब्रांडसेन प्राइवेट लिमिटेड को बड़ी राहत देते हुए आयकर विभाग द्वारा किए गए अधिकांश ट्रांसफर प्राइसिंग समायोजनों (Transfer Pricing Adjustments) को खारिज कर दिया है। न्यायाधिकरण ने माना कि कंपनी द्वारा अपनाई गई Transactional Net Margin Method (TNMM) ही इस मामले में सबसे उपयुक्त पद्धति है और विभाग द्वारा लागू की गई Comparable Uncontrolled Price (CUP) पद्धति विश्वसनीय नहीं है।
विवाद कंपनी द्वारा अपनी संबद्ध विदेशी इकाइयों (Associated Enterprises) को किए गए रासायनिक उत्पादों की बिक्री से जुड़ा था। ट्रांसफर प्राइसिंग अधिकारी (TPO) ने TNMM को अस्वीकार कर CUP पद्धति अपनाते हुए करोड़ों रुपये की आय बढ़ाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि ITAT ने कहा कि इसी कंपनी के पूर्व वर्षों के मामलों में भी यही मुद्दा उठ चुका है और तब भी न्यायाधिकरण तथा गुजरात हाईकोर्ट ने TNMM को सही माना था। चूंकि वर्तमान वर्षों में तथ्यों में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं था, इसलिए पहले के फैसलों का पालन किया जाना चाहिए।
न्यायाधिकरण ने यह भी बरकरार रखा कि कंपनी द्वारा अपनी विदेशी संबद्ध इकाइयों से प्राप्त मार्केटिंग और सेल्स प्रमोशन सेवाओं पर किया गया भुगतान उचित था। ITAT ने कहा कि कर अधिकारियों का अधिकार केवल आर्म्स लेंथ प्राइस (ALP) निर्धारित करने तक सीमित है, वे यह तय नहीं कर सकते कि किसी व्यवसाय को ऐसी सेवाओं की आवश्यकता थी या नहीं।
इसके अलावा, पूंजीगत कार्य प्रगति (CWIP) पर ब्याज पूंजीकरण से जुड़े विवाद में भी कंपनी को राहत मिली। न्यायाधिकरण ने पाया कि आयकर विभाग यह साबित नहीं कर सका कि विदेशी वाणिज्यिक उधार (ECB) का उपयोग वास्तव में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण में किया गया था। केवल अनुमान के आधार पर ब्याज को पूंजीकृत नहीं किया जा सकता।
ITAT ने अनुसंधान एवं विकास (R&D) खर्चों पर आयकर अधिनियम की धारा 35(2AB) के तहत दावा किए गए कटौती लाभ को भी सही माना। न्यायाधिकरण ने स्पष्ट किया कि 1 अप्रैल 2016 से पहले DSIR द्वारा खर्च का मात्रात्मक प्रमाणन अनिवार्य नहीं था, इसलिए केवल उसी आधार पर कटौती से इनकार नहीं किया जा सकता।
हालांकि एक मुद्दे पर आयकर विभाग को सफलता मिली। न्यायाधिकरण ने कहा कि अतिरिक्त मूल्यह्रास (Additional Depreciation) केवल नई मशीनरी या संयंत्र पर ही उपलब्ध है। यदि केवल पुराने संयंत्र में स्पेयर पार्ट्स या पुर्जों का प्रतिस्थापन किया गया है, तो उस पर अतिरिक्त मूल्यह्रास का लाभ नहीं दिया जा सकता। इस कारण कंपनी के पक्ष में दिया गया राहत आदेश इस मुद्दे पर पलट दिया गया।
यह फैसला ट्रांसफर प्राइसिंग मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ITAT ने दोहराया है कि यदि पूर्व वर्षों में समान तथ्यों पर कोई विधि स्वीकार की जा चुकी है, तो बिना ठोस कारण उसके विपरीत रुख नहीं अपनाया जा सकता।
